पति को दहेज के झूठे केस में फंसा रही थी पत्नी, हाईकोर्ट ने सिखाया सबक बोला- ये मानसिक क्रूरता, पति को मिला न्याय

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 15 Feb, 2026 02:12 PM

false dowry allegations termed mental cruelty high court dissolves marriage

बिलासपुर से एक अहम कानूनी फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज कराई गई झूठी और निराधार दहेज प्रताड़ना शिकायत को मानसिक क्रूरता करार दिया है। कोर्ट ने माना कि इस तरह के आरोप लगाकर पति और उसके परिजनों को जेल...

बिलासपुर: बिलासपुर से एक अहम कानूनी फैसले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज कराई गई झूठी और निराधार दहेज प्रताड़ना शिकायत को मानसिक क्रूरता करार दिया है। कोर्ट ने माना कि इस तरह के आरोप लगाकर पति और उसके परिजनों को जेल भिजवाने की कोशिश करना वैवाहिक रिश्ते को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।

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मामले में पति ने धमतरी परिवार न्यायालय में क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी, जिसे परिवार न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील की। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद पति की अपील स्वीकार करते हुए उसे तलाक का हकदार माना। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी द्वारा सास के खिलाफ निराधार और मानहानिकारक आरोप लगाना, पति और उसके परिवार के बरी होने के बावजूद उच्च अदालतों में अपील दायर करना और उन्हें सजा दिलाने के प्रयास करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।

गौरतलब है कि महिला ने 2017 में आईपीसी की धारा 498A के तहत पति, उसके भाई और मां के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। ट्रायल कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट के इस फैसले को वैवाहिक मामलों में झूठे आपराधिक आरोपों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है

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