Edited By Vikas Tiwari, Updated: 31 Mar, 2026 02:42 PM

कुश्ती जैसे कठिन खेल में जहां शारीरिक मजबूती सबसे बड़ी ताकत होती है, वहीं झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान Poonam Oran ने अपने अदम्य साहस से यह साबित कर दिया कि हौसले चोट से बड़े होते हैं।
रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): कुश्ती जैसे कठिन खेल में जहां शारीरिक मजबूती सबसे बड़ी ताकत होती है, वहीं झारखंड की 19 वर्षीय पहलवान Poonam Oran ने अपने अदम्य साहस से यह साबित कर दिया कि हौसले चोट से बड़े होते हैं।

पहले Khelo India Tribal Games 2026 में पूनम ने महिलाओं के 50 किग्रा वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। खास बात यह रही कि उन्होंने यह जीत चोटिल कंधे के साथ हासिल की। फाइनल मुकाबले में पूनम बाएं कंधे पर पट्टी बांधकर उतरीं। हर मूव के दौरान दर्द साफ झलक रहा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और तेलंगाना की के. गीता को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। पूनम का यह सफर आसान नहीं रहा। साल 2017 में कुश्ती की शुरुआत के कुछ समय बाद ही उनका कंधा उतर गया था, जिसके कारण उन्हें करीब एक साल तक मैट से दूर रहना पड़ा। इसके बाद भी चोटों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा, लेकिन उन्होंने लगातार संघर्ष जारी रखा। 2018 और 2019 में उन्होंने स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) में कांस्य पदक जीते, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक उन्हें कोई बड़ा पदक नहीं मिला। करीब 9 साल बाद यह गोल्ड उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।
पूनम ने कहा, ‘जब इतने सालों तक हार नहीं मानी, तो अब कैसे मानती। चोट पुरानी है, लेकिन हौसला उससे बड़ा है।’ उन्होंने बताया कि परिवार ने खेलने से मना किया था, लेकिन कोच और सपोर्ट स्टाफ के भरोसे ने उन्हें हिम्मत दी। झारखंड के चतरा जिले के सुइयाबार गांव की रहने वाली पूनम पिछले कई वर्षों से रांची में रहकर प्रशिक्षण ले रही हैं। खेल के साथ-साथ वह Ranchi University से बीए (पॉलिटिकल साइंस) की पढ़ाई भी कर रही हैं। अब उनका अगला लक्ष्य जूनियर नेशनल ट्रायल्स के लिए क्वालीफाई करना है और इस सफलता को आगे भी जारी रखना है।