Edited By Vikas Tiwari, Updated: 29 Nov, 2025 05:53 PM

क्या कभी आपने ये सुना या पढ़ा है, कि कोई गांव मध्यप्रदेश का है, लेकिन है वो गुजरात में... नहीं जानते तो आज इस रिपोर्ट में जानिए .... अलीराजपुर जिले का साजनपुर गांव अपने अनोखे इतिहास और भौगोलिक संरचना के कारण पूरे देश में खास पहचान रखता है। आजादी से...
भोपाल: क्या कभी आपने ये सुना या पढ़ा है, कि कोई गांव मध्यप्रदेश का है, लेकिन है वो गुजरात में... नहीं जानते तो आज इस रिपोर्ट में जानिए .... अलीराजपुर जिले का साजनपुर गांव अपने अनोखे इतिहास और भौगोलिक संरचना के कारण पूरे देश में खास पहचान रखता है। आजादी से पहले यह गांव छोटा उदयपुर रियासत का हिस्सा हुआ करता था। लेकिन कट्ठीवाड़ा और छोटा उदयपुर रियासतों के बीच वैवाहिक संबंधों के चलते राजा ने इस गांव को अपनी पुत्री को दहेज में दे दिया। इसी कारण साजनपुर गुजरात की सीमा के अंदर स्थित होने के बावजूद मध्यप्रदेश का हिस्सा बन गया।
चारों ओर गुजरात से घिरा है ये गांव.. देखिए गूगल मैप की तस्वीर

गुजरात के अंदर है MP का ये गांव
आजादी के बाद जब रियासतों का विलय किया जा रहा था, तब साजनपुर के राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाए। इस कारण गुजरात और मध्यप्रदेश के बीच लंबे समय तक कानूनी विवाद चलता रहा और आखिरकार 1956 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे मध्यप्रदेश का हिस्सा घोषित कर दिया। तब से यह गांव पूरी तरह से प्रशासनिक रूप से एमपी के अधीन है, लेकिन भौगोलिक रूप से गुजरात के अंदर लगभग 3 किलोमीटर तक स्थित है।
‘भाषा गुजराती, लेकिन काम हिंदी में होता है’
स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘हमारा गांव महारानी साहब के साथ दहेज में आया था।’ साजनपुर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली सहित सभी सरकारी सुविधाएं मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती हैं। गांव लगभग 1500 की आबादी वाला है और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। गांव की संस्कृति में गुजरात की गहरी झलक दिखाई देती है। लोग रोजमर्रा की बातचीत गुजराती में करते हैं, जबकि सरकारी कामकाज हिंदी में होता है। गांव के स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है, लेकिन गुजराती तीसरी भाषा के रूप में भी शामिल नहीं है। साजनपुर की अनोखी स्थिति के कारण यहाँ कई प्रशासनिक चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। चुनावों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना, राजस्व विवादों का समाधान और अतिक्रमण मामलों की सुनवाई, सब कुछ सीमा की जटिलताओं के बीच होता है। गांव का पुलिस थाना चांदपुर में लगता है और कई बार अपराधी गुजरात सीमा में जाकर बचने की कोशिश भी करते हैं।
‘गुजरात में शराबबंदी, लेकिन इस गांव में नहीं’
गुजरात में शराबबंदी लागू है, जबकि साजनपुर में यह प्रतिबंधित नहीं है। इस वजह से शराब तस्करी भी यहां की एक बड़ी समस्या बन जाती है, जिससे सीमाई प्रशासन और ग्रामीण दोनों प्रभावित होते हैं। प्राकृतिक रूप से खूबसूरत साजनपुर, बारिश के मौसम में किसी हिल स्टेशन जैसा दिखाई देता है और अपनी अद्भुत भौगोलिक बनावट के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। हालांकि यह गांव मध्यप्रदेश का हिस्सा है, लेकिन बस या ट्रेन पकड़ने के लिए ग्रामीणों को दाहोद और लिंबडी जैसे गुजरात के कस्बों तक जाना पड़ता है। साजनपुर न सिर्फ अपने इतिहास के कारण अनोखा है, बल्कि दो राज्यों की सीमाओं के बीच अपनी विशिष्ट पहचान के कारण भी चर्चा में रहता है।