नसबंदी कराने नहीं, खुलवाने के कैंप लगवा रही सरकार, जानें क्यों इस राज्य में कपल्स को ये सुविधा दे रही सरकार

Edited By meena, Updated: 31 May, 2026 02:13 PM

in jagdalpur the government is organizing camps not for sterilization but for

छत्तीसगढ़ के बस्तर में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़े पूर्व नक्सलियों के सामाजिक और पारिवारिक पुनर्वास की दिशा में प्रशासन ने एक नयी पहल शुरू की है। नक्सली संगठन के दौरान नसबंदी कराए जाने के...

जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़े पूर्व नक्सलियों के सामाजिक और पारिवारिक पुनर्वास की दिशा में प्रशासन ने एक नयी पहल शुरू की है। नक्सली संगठन के दौरान नसबंदी कराए जाने के कारण संतान सुख से वंचित रहे युवाओं के लिए जगदलपुर के महारानी अस्पताल में विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया, जहां 28 आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की जांच कर उपचार प्रक्रिया प्रारंभ की गयी। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य ऐसे पूर्व नक्सलियों को सामान्य पारिवारिक जीवन की ओर लौटने में मदद करना है, जो संगठन में रहते हुए कराई गई नसबंदी के कारण विवाह के बाद भी संतान प्राप्ति से वंचित हैं। शिविर में यूरोलॉजिकल सोसायटी वेस्टर्न जोन तथा रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)के विशेषज्ञ यूरोलॉजिस्ट चिकित्सकों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों की टीम ने नसबंदी खुलवाने (रिकैनालाइजेशन) के इच्छुक 28 युवाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच रिपोटर् के आधार पर पात्र पाए गए व्यक्तियों के पुनर्वाहिनीकरण शल्यचिकित्सा किए जाएंगे। चिकित्सकों के अनुसार सफल उपचार के बाद ये युवा सामान्य पारिवारिक जीवन व्यतीत कर सकेंगे तथा पिता बनने का सुख प्राप्त कर पाएंगे। उल्लेखनीय है कि बस्तर में सक्रिय रहे नक्सली संगठनों में कई पुरुष सदस्यों की नसबंदी कराए जाने के मामले पूर्व में भी सामने आ चुके हैं। संगठन का मानना था कि पारिवारिक जिम्मेदारियां और बच्चों का पालन-पोषण उनकी गतिविधियों में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। इसी सोच के चलते अनेक युवाओं को अपनी इच्छा के विरुद्ध नसबंदी करानी पड़ी थी। मुख्यधारा में लौटने और विवाह होने के बावजूद संतान नहीं होने के कारण ऐसे युवाओं को मानसिक, सामाजिक तथा पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पुनर्वास की प्रक्रिया को केवल आर्थिक सहायता और रोजगार तक सीमित न रखते हुए पारिवारिक जीवन को सामान्य बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। अधिकारियों का मानना है कि सम्मानजनक जीवन और परिवार बसाने का अवसर मिलने से आत्मसमर्पित नक्सलियों का पुनर्वास और अधिक प्रभावी होगा। शिविर के दौरान बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, सुंदरराज पी., आकाश छिकारा और शलभ सिन्हा ने सरेंडर नक्सलियों से मुलाकात की। अधिकारियों ने उन्हें सकारात्मक जीवन की ओर आगे बढ़ने, समाज की मुख्यधारा से जुड़ने तथा शासन की विभिन्न पुनर्वास योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!