एग्रीस्टैक में मध्यप्रदेश नंबर-1, अंतरराष्ट्रीय बाजार में छाया बालाघाट का चिन्नौर चावल

Edited By meena, Updated: 02 Nov, 2026 01:12 PM

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों और कृषि के लिए अथक मेहनत कर रहे हैं। उनका सीधा फोकस किसानों को लाभ पहुंचाना है। उनके इस प्रयास का...

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों और कृषि के लिए अथक मेहनत कर रहे हैं। उनका सीधा फोकस किसानों को लाभ पहुंचाना है। उनके इस प्रयास का ही परिणाम है कि केन्द्र सरकार की एग्रीस्टैक के बेहतर क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश पहले नंबर पर है। एग्रीस्टैक भारत की डिजिटल कृषि व्यवस्था की नींव है। इसकी खासियत है कि यह सही समय पर किसानों को मदद पहुंचाती है। इसके अंतर्गत 1.20 करोड़ से ज्यादा किसानों की आईडी बनाई गई है। करीब 4 करोड़ से अधिक खेतों पर फसलों का सर्वे कर सभी खेतों का जियो रेफरेंस कराया गया है। दूसरी ओर, बालाघाट जिले का जीआईटैग प्राप्त 'बालाघाट चिन्नौर' चावल भी धूम मचा रहा है। उसने हाल ही में नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 'भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026' (BIRC-2026) में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को आकर्षित किया।

गौरतलब है कि, मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां किसानों के व्यापक हित में भावांतर योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष में सरसों और सोयाबीन के लिए भावांतर योजना लागू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार समग्र किसान कल्याण के लिए संकल्पित है। सरकार खेती को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे किसानों के आर्थिक लाभ में वृद्धि हो। सीएम डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में व्यापक निर्णय लिए हैं। उड़द के उपार्जन पर एमएसपी के अलावा 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में 15 जिलों के 4000 किसानों से 3000 मीट्रिक टन श्रीअन्न का उपार्जन किया गया है। उपार्जन के अलावा 1000 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि के हिसाब से उन्हें भुगतान किया गया है।

करोड़ों के उर्वरक अनुदान की हुई बचत

यह पूरे देश में पहली बार हुआ कि डिजिटल प्रणाली 'ई-विकास' का उपयोग कर उर्वरक वितरण किया गया। इसके माध्यम से 48.34 पात्र किसानों को 34.46 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया। इसमें 3.94 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बचत हुई। इससे 764.65 करोड़ के उर्वरक अनुदान की बचत हुई है। इस व्यवस्था को अपनाने के लिए केन्द्र सरकार अन्य राज्यों से भी आग्रह कर रही है। किसानों के हित में मंडियों को आधुनिक सुविधाओं से सम्पन्न बनाया गया है। सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग प्लांट की स्थापना की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश की 3 मंडियों में प्लांट कार्य कर रहा है। दस मिलियन टन क्षमता के तौल-कांटों की स्थापना की गई है। अभी 21 मंडियों में यह सुविधा है।

फसल ऋण योजना से किसानों को फायदा

फसल संबंधी परामर्श एवं जानकारी देने के लिए एक किसान हेल्पलाइन (155253) शुरू की गई है। कृषि विभाग नई योजना मप्र प्राकृतिक कृषि योजना लागू करने पर विचार कर रहा है। योजना में प्रत्येक जिले के 100 गांवों के 5-5 किसानों को 500 रुपये प्रतिमाह अनुदान देना प्रस्तावित है। किसानों के व्यापक हित में ब्याज रहित फसल ऋण योजना में 2025-26 में 35 लाख किसानों को 24 हजार करोड़ का फसल ऋण वितरित किया गया। वर्ष 2026-27 में अब तक 15 हजार करोड़ रुपये वितरित किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 1250 करोड़ रुपये ज्यादा हैं। किसानों को वर्ष 2026-27 में 18.52 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का वितरण किया गया।

बालाघाट चिन्नौर ने बनाई विशेष पहचान

दूसरी ओर, नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 'भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026' (BIRC-2026) में मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के जीआई टैग प्राप्त 'बालाघाट चिन्नौर' चावल ने अपनी विशेष पहचान दर्ज कराई। 'एक जिला-एक उत्पाद' के तहत चयनित इस सुगंधित चावल का सम्मेलन में भव्य प्रदर्शन किया गया। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) भोपाल एवं कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के संयुक्त तत्वावधान में चिन्नौर चावल के प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेष स्टॉल लगाया गया था। इस वैश्विक आयोजन में बालाघाट जिले का प्रतिनिधित्व लालबर्रा चिन्नौर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने किया। कंपनी ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के चावल निर्यातकों, व्यापारियों और प्रतिनिधियों को चिन्नौर चावल की गुणवत्ता, प्राकृतिक सुगंध और इसके औषधीय व पारंपरिक महत्व से अवगत कराया।

अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से संवाद

इस वैश्विक मंच के माध्यम से स्थानीय किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को बड़े भारतीय निर्यातकों सहित विदेशी बायर्स के साथ सीधे बिजनेस-टू-बिजनेस संवाद करने का सुनहरा अवसर मिला है। इससे बालाघाट के जैविक और पारंपरिक रूप से उत्पादित चिन्नौर चावल को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं, जिसका सीधा आर्थिक लाभ स्थानीय धान उत्पादक किसानों को मिलेगा। गौरतलब है कि अपनी अनुपम खुशबू, पकाने के बाद की कोमलता और मिठास के लिए प्रसिद्ध चिन्नौर चावल को वर्ष 2021 में जीआई टेग मिला था। भारत मंडपम के इस बड़े मंच पर चिन्नौर के स्टॉल पर आने वाले आगंतुकों और निर्यातकों द्वारा इस अनोखे उत्पाद की जमकर सराहना की गई।

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