Edited By Vikas Tiwari, Updated: 05 Apr, 2026 06:28 PM

मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश की अग्रणी ताकत बनाने के लिए सरकार ने बड़ा विजन तय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2028 तक प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पशुपालन, डेयरी विकास...
भोपाल: मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश की अग्रणी ताकत बनाने के लिए सरकार ने बड़ा विजन तय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2028 तक प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पशुपालन, डेयरी विकास और गो-संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं लागू की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को पशुपालन के लिए प्रोत्साहित कर उनकी आय बढ़ाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इसी दिशा में पशुपालन विभाग का नाम बदलकर गौपालन विभाग कर दिया गया है। ‘स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025’ के तहत बड़े स्तर पर गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 5 हजार से अधिक क्षमता वाली आधुनिक गौशालाएं शामिल हैं। प्रदेश के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में आदर्श गौशालाएं स्थापित हो चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में निर्माण कार्य जारी है। ग्वालियर में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी को वर्तमान 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इसके लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ समझौता कर सांची ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर विकास योजना’ के तहत 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई के लिए 42 लाख रुपये तक का ऋण और 25 से 33 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही प्रदेश में दुग्ध संकलन क्षमता को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने और 26 हजार गांवों तक डेयरी नेटवर्क विस्तार का लक्ष्य रखा गया है। सरकार द्वारा गो-संरक्षण के लिए 505 करोड़ रुपये का बजट भी तय किया गया है और गौशालाओं में प्रति गोवंश अनुदान राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी प्रयासों से न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और किसान आत्मनिर्भर बनेंगे।