बड़ा झटका! MP में 126 अस्पताल आयुष्मान से OUT, जरूरतमंदों की बढ़ी टेंशन

Edited By Himansh sharma, Updated: 05 Apr, 2026 03:53 PM

ayushman blow 126 hospitals removed in mp

मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है।

भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए नियमों के तहत प्रदेश के 126 निजी अस्पतालों की आयुष्मान योजना में मान्यता रद्द कर दी गई है। इस फैसले के बाद अब इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी।

जानकारी के अनुसार, राज्य में योजना के अंतर्गत कुल 398 निजी अस्पताल शामिल थे, जिनमें से बड़ी संख्या में अस्पताल इस नए नियम की जद में आए हैं। सबसे अधिक प्रभावित शहरों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर शामिल हैं, जहां कुल मिलाकर 126 अस्पतालों की मान्यता समाप्त की गई है।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, भोपाल में 51, इंदौर में 30, ग्वालियर में 33 और जबलपुर में 12 निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना से बाहर किया गया है। आयुष्मान भारत निरामयम के सीईओ के अनुसार यह कदम अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मानकों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

NABH सर्टिफिकेट बना मुख्य आधार

नए नियमों के तहत अब केवल वही अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत इलाज कर पाएंगे, जिनके पास NABH (National Accreditation Board for Hospitals & Healthcare Providers) का प्रमाणपत्र होगा। बिना NABH सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों को योजना से तत्काल बाहर कर दिया गया है। वहीं, एंट्री लेवल NABH वाले अस्पतालों को दो साल का समय दिया गया है, ताकि वे अपने मानकों को अपग्रेड कर सकें। यदि निर्धारित समय में वे आवश्यक प्रमाणन प्राप्त नहीं करते, तो उनकी मान्यता भी समाप्त कर दी जाएगी।

मरीजों पर असर की आशंका

इस निर्णय के बाद विशेषज्ञों और अस्पताल संचालकों का मानना है कि इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों पर पड़ेगा, जो आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज पर निर्भर हैं। चार प्रमुख शहरों में निजी अस्पतालों का एक बड़ा हिस्सा इस नियम से प्रभावित हुआ है, जिससे मरीजों को अब बड़े और सीमित अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इसके चलते इन अस्पतालों में भीड़ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इलाज में देरी और असुविधा की स्थिति बन सकती है।

अस्पताल संचालकों की चिंता

अस्पताल संचालकों का कहना है कि नए नियमों से छोटे और मध्यम स्तर के अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। उनका तर्क है कि अचानक लागू हुए इस बदलाव से मरीजों के सामने विकल्प कम हो गए हैं और योजना के लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नियम का उद्देश्य और सवाल

सरकार की ओर से इस कदम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाना बताया जा रहा है, लेकिन इसके प्रभाव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आयुष्मान कार्ड धारकों को उनके नजदीकी अस्पतालों में इलाज नहीं मिलेगा, तो समय पर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होगी।

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