उज्जैन में दशहरा पर्व में रावण दहन को रोकने के लिए लगे पोस्टर! लिखा गया- रावण महान विद्वान, रावण को जलाना ब्राह्मणों का अपमान!

Edited By Desh sharma, Updated: 24 Sep, 2025 06:37 PM

posters put up in ujjain to prevent ravana dahan during dussehra celebrations

उज्जैन को महाकाल की नगरी के नाम से जाना जाता है, यहां पर धर्म और आस्था का अलग ही आकर्षण होता है। अबकी बार दशहरे के अवसर पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई प्रमुख इलाकों देवास रोड, गोपाल मंदिर चौक और महाकालेश्वर मंदिर परिसर...

उज्जैन (देश शर्मा): उज्जैन को महाकाल की नगरी के नाम से जाना जाता है, यहां पर धर्म और आस्था का अलग ही आकर्षण होता है। लेकिन अबकी बार दशहरे के अवसर पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई प्रमुख इलाकों के आसपास कुछ पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर रावण दहन का विरोध जताया गया है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन को रोकने के लिए कई जगह पोस्टर लगा दिए हैं।

रावण एक महान विद्वान थे, उनका दहन परंपरा के नाम पर अपमान

 

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इन पोस्टरों में लिखा गया है कि “रावण एक महान विद्वान थे, उनका दहन परंपरा के नाम पर अपमान है।” स्थानीय लोगों ने बताया कि मंगलवार सुबह जब लोग दशहरा आयोजन की तैयारियों में लगे हुए थे, तब पोस्टर दिखाई दिए। कुछ धार्मिक संगठनों ने इसे सांस्कृतिक परंपराओं पर हमला बताया और कड़ी प्रतिक्रिया दी। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि रावण दहन न केवल रामायण की परंपरा का हिस्सा है, बल्कि अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक भी है।

इतिहास या रामायण में कहीं भी रावण दहन का जिक्र नहीं

दरअसल, पूरा मामला तब गरमा गया जब, उज्जैन के परशुराम मंदिर में अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज की बैठक हुई थी।  इस दौरान रावण दहन का विरोध करने का फैसला लिया गया।  महाकाल सेना ने खासतौर पर ब्राह्मणों से अपील की है कि वे रावण दहन जैसे आयोजनों में हिस्सा न लें । संरक्षक महेश पुजारी का कहना है कि इतिहास या रामायण में कहीं भी रावण दहन का जिक्र नहीं है, यह परंपरा अब मनोरंजन और राजनीति का साधन बन चुकी है

वहीं शहर के कुछ बुद्धिजीवियों ने हालांकि इसे स्वतंत्र अभिव्यक्ति का हिस्सा बताया, लेकिन धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाने की सलाह भी दी। स्थानीय प्रशासन ने दशहरा आयोजनों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। कुछ यूजर्स ने रावण को विद्वान बताकर उनका सम्मान करने की बात कही, तो वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इसे “सदियों से चली आ रही परंपराओं को तोड़ने का प्रयास” बताया।

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