Breaking Indore: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 2 और मौतें, 20 जिंदगियां लील गया सिस्टम

Edited By Himansh sharma, Updated: 07 Jan, 2026 12:59 PM

2 more die due to contaminated water in bhagirathpura

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली त्रासदी थमने का नाम नहीं ले रही है।

इंदौर। (सचिन बहरानी): मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली त्रासदी थमने का नाम नहीं ले रही है। नलों से आ रहा गंदा पानी अब सीधे लोगों की जान ले रहा है। मंगलवार को दो और लोगों की मौत के बाद इस भयावह त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन अब भी सच्चाई स्वीकारने से बचता नजर आ रहा है।

शहर में दूषित पानी से फैल रही बीमारी अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं रही, बल्कि एक जानलेवा आपदा बन चुकी है। उल्टी-दस्त और गंभीर संक्रमण से जूझ रहे मरीजों से अस्पताल भरे पड़े हैं, स्वास्थ्य केंद्रों पर लंबी कतारें लगी हैं, फिर भी प्रशासन हर मौत को अलग-अलग कारणों से जोड़कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है।

महाराष्ट्र में हुआ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार

इस त्रासदी में श्रावण नथ्थु खुपराव की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 25 दिसंबर को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 29 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। उनका अंतिम संस्कार महाराष्ट्र के बुलढ़ाना जिले के सेलापुर गांव में किया गया।
परिजनों का कहना है कि श्रावण खुपराव का पोता नगर निगम की पानी की टंकी में कार्यरत है और बेटा सुरक्षाकर्मी है, इसके बावजूद पूरा परिवार दूषित पानी का शिकार बन गया। सवाल यह है कि जब पानी की व्यवस्था से जुड़े लोग ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

47 वर्षीय रामकली की भी गई जान

इसी कड़ी में 47 वर्षीय रामकली पत्नी जगदीश की मौत ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। 28 दिसंबर को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि रामकली को पहले कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। अचानक बिगड़ी तबीयत और मौत ने दूषित पानी की भूमिका को और मजबूत कर दिया है।

हर घर में बीमार, अस्पतालों में हाहाकार

भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में हालात ऐसे हैं कि शायद ही कोई घर हो जहां बीमार मरीज न हों। अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं, डॉक्टरों पर काम का दबाव बढ़ गया है, लेकिन जिम्मेदार अफसर अब भी मौतों को “स्वाभाविक” बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।

आज सवाल यह नहीं है कि मौतें हुई हैं या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि कितनी मौतों के बाद सिस्टम जागेगा? क्या 20 जिंदगियां भी प्रशासन को झकझोरने के लिए काफी नहीं हैं? भागीरथपुरा में बहता दूषित पानी अब सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का सबसे बड़ा सबूत बन चुका है।

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