Edited By Himansh sharma, Updated: 12 Mar, 2026 01:50 PM

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंधों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंधों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि महिला बालिग है और उसकी सहमति से संबंध बने हैं, तो हर मामले में इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने करीब दो दशक पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया।
यह मामला सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2000 में एक युवती 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान किराए के मकान में रह रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक युवक से हुई, जो उसी इलाके में पढ़ाई कर रहा था। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर प्रेम संबंध बन गए।
युवती का आरोप था कि युवक ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और यह सिलसिला करीब तीन साल तक चलता रहा। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अपने-अपने गांव लौट गए, लेकिन उनका संपर्क बना रहा। युवती के मुताबिक, वह कई बार युवक के घर भी गई, जहां उसे पत्नी की तरह साथ रखा गया।
कुछ समय बाद युवती ने युवक से शादी की बात की, लेकिन युवक अचानक उसे छोड़कर चला गया और वापस नहीं लौटा। इसके बाद युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया। मामले की सुनवाई के बाद अंबिकापुर की सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल की सजा और जुर्माना लगाया था। हालांकि, आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को कानून के अनुरूप नहीं माना और उसे रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाना हर परिस्थिति में दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता। खासकर तब, जब महिला बालिग हो और यह साबित न हो सके कि आरोपी ने शुरू से ही धोखे की नीयत से संबंध बनाए थे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि घटना के समय महिला की उम्र 26 वर्ष थी और उसे अपने निर्णय और उसके परिणामों की पूरी समझ थी। ऐसे में इसे सहमति से बने संबंध माना जाएगा। करीब 20 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट के इस फैसले से आरोपी को बड़ी राहत मिली है।