Edited By Vandana Khosla, Updated: 10 Apr, 2026 11:45 AM

भोपालः मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के करीब ढाई लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराता नजर आ रहा है। अब इन शिक्षकों को पात्रता परीक्षा (टीईटी) देना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, कई वर्षों का अनुभव होने के बावजूद शिक्षकों को यह परीक्षा...
भोपालः मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के करीब ढाई लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराता नजर आ रहा है। अब इन शिक्षकों को पात्रता परीक्षा (टीईटी) देना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, कई वर्षों का अनुभव होने के बावजूद शिक्षकों को यह परीक्षा पास करनी होगी। इस फैसले से दोनों राज्यों के शिक्षकों में चिंता और हलचल बढ़ गई है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। जिसमें कहा गया कि सरकारी हो या निजी, सभी स्कूलों में प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं को पढ़ाने वाले हर शिक्षक के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना जरूरी होगा। इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश के करीब 1.5 लाख और छत्तीसगढ़ के लगभग 75 हजार शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।
छत्तीसगढ़ में हुई टीईटी परीक्षा में 92% शिक्षक फेल
वहीं, छत्तीसगढ़ में हालात और गंभीर बताई जा रही हैं। हाल ही में 1 फरवरी 2026 को आयोजित टीईटी के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। परीक्षा में लगभग 92% शिक्षक फेल हुए है। ऐसे में इन शिक्षकों की कुर्सी खतरे में है।
शिक्षक संगठनों ने इसे मानवीय अधिकारों का हनन बताया
शिक्षक संगठनों का कहना है कि 20–30 साल तक सेवा देने के बाद अब परीक्षा देना और उसे अनिवार्य करना उनके साथ अन्याय है। वहीं, एमपी सरकार ने संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल करने की बात कही है। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार ने समस्या के समाधान पर विचार करने की बात कही है।