Edited By meena, Updated: 13 Jul, 2026 06:56 PM

राजनगर विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान मतदान से ठीक पहले हुए बहुचर्चित और संवेदनशील सलमान खान हत्याकांड में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है...
छतरपुर (राजेश चौरसिया) : राजनगर विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान मतदान से ठीक पहले हुए बहुचर्चित और संवेदनशील सलमान खान हत्याकांड में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस कार्यकर्ता सलमान खान की वाहन से कुचलकर हुई संदिग्ध मौत के मामले की नए सिरे से और पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अधीन एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत के इस बड़े आदेश के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर भारी हलचल पैदा हो गई है।
17 नवंबर 2023 को मतदान से ठीक पहले हुई थी संदिग्ध वारदात
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान 17 नवंबर 2023 को होने वाले मतदान से ठीक पहले राजनगर विधानसभा क्षेत्र में भारी राजनैतिक तनाव व्याप्त हो गया था। इसी दौरान राजनगर से कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर विक्रम सिंह (नाती राजा) के ड्राइवर और सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता सलमान खान की गाड़ी से कुचलकर संदिग्ध परिस्थितियों में दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में सियासी भूचाल आ गया था और कांग्रेस ने तत्कालीन सत्ताधारी दल के नेताओं पर राजनैतिक रसूख के बल पर मामले को दबाने और हत्या करने के गंभीर आरोप लगाए थे।
राजनीतिक प्रभाव के चलते गवाहों को किया गया दरकिनार
मामले की गंभीरता से सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने पिछली जांच प्रक्रियाओं को लेकर बेहद तल्ख रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले की जो पिछली जांच की गई थी, उसमें साफ तौर पर राजनीतिक प्रभाव का असर दिखाई दे रहा था। इसी राजनैतिक दबाव के कारण जांच अधिकारियों द्वारा चश्मदीद गवाहों के बयानों को पूरी तरह से नजरअंदाज और दरकिनार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि न्याय की शुचिता बनाए रखने के लिए इस मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच होना बेहद अनिवार्य है।
गवाहों के शपथ पत्र के बावजूद पुलिस ने नहीं दर्ज किए थे बयान
सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष (सलमान खान के परिवार और कांग्रेस) की ओर से अदालत के सामने बेहद मजबूत दलीलें और तथ्य रखे गए। पीड़ित पक्ष के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि घटना के समय मौके पर मौजूद कई अहम चश्मदीद गवाहों ने बाकायदा शपथ पत्र (एफिडेविट) देकर पुलिस प्रशासन को इस पूरी वारदात की बिंदुवार जानकारी दी थी। इसके बावजूद, स्थानीय पुलिस ने राजनैतिक दबाव के चलते उन महत्वपूर्ण गवाहों के बयान तक दर्ज करना जरूरी नहीं समझा था। पीड़ित पक्ष की इन दलीलों को सही पाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में एसआईटी (SIT) गठित कर पूरे मामले का दूध का दूध और पानी का पानी करने का आदेश दिया है।