Edited By meena, Updated: 11 Aug, 2026 01:35 PM

मध्यप्रदेश के भिण्ड जिला न्यायालय के प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा सहित चार आरोपियों की निगरानी याचिकाएं खारिज कर दीं। आरोपियों पर मुंबई बलात्कार...
भिण्ड : मध्यप्रदेश के भिण्ड जिला न्यायालय के प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा सहित चार आरोपियों की निगरानी याचिकाएं खारिज कर दीं। आरोपियों पर मुंबई बलात्कार मामले के आरोपी विमल यादव को कानूनी कारर्वाई से बचाने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर करने का आरोप है। अदालत ने सातों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश को बरकरार रखा। भिण्ड की अदालत ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। आदेश में तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, पटवारी संजीव शर्मा, सचिव शेरसिंह यादव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन, विमल यादव, आशुतोष सिंह यादव और राजकुमार दुबे के नाम शामिल हैं। आरोप है कि विमल यादव को कानूनी कारर्वाई से बचाने के लिए सरकारी रिकॉडर् में कथित हेरफेर कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया।
भिण्ड की न्यायिक दण्डाधिकारी (सीजेएम) अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं 336(2), 336(3), 340(1) और 340(2) के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे। सीजेएम अदालत के आदेश के बाद मोहनलाल शर्मा सहित चार आरोपियों ने प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश को चुनौती देते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायालय में निगरानी याचिकाएं दायर की थीं। सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने चारों याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे आरोपियों को प्राथमिकी के आदेश से राहत नहीं मिल सकी।
अदालत के आदेश के बाद पुलिस मामले में आगे की कारर्वाई करेगी। जांच के दौरान फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने की प्रक्रिया, सरकारी रिकॉडर् में हुई कथित हेरफेर और इसमें संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल मुंबई के बलात्कार मामले में आरोपी विमल यादव को कानूनी कारर्वाई से बचाने के लिए किस तरह किया गया।