₹65 लाख की सरकारी मदद के बाद भी 1 साल के 'स्टाइपेंड' पर बवाल: भोपाल में MBBS इंटर्न्स के प्रदर्शन पर उठीं उंगलियां

Edited By Himansh sharma, Updated: 09 Sep, 2026 11:31 AM

bhopal mbbs interns protest over stipend hike

इंटर्नशिप भत्ते में 110% की बढ़ोतरी की मांग को लेकर भोपाल में MBBS छात्रों द्वारा किए जा रहे सड़क जाम ने अब जन आक्रोश और नैतिक बहस का रूप ले लिया है।

भोपाल: इंटर्नशिप भत्ते में 110% की बढ़ोतरी की मांग को लेकर भोपाल में MBBS छात्रों द्वारा किए जा रहे सड़क जाम ने अब जन आक्रोश और नैतिक बहस का रूप ले लिया है। 8 सितंबर 2026 की शाम 5:00 बजे से जारी इस अवैध सड़क कब्जे के कारण लाखों नागरिक परेशान हैं। इस बीच, स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुपों और आम जनता के बीच यह सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है कि जब सरकार प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ाई पर जनता के 65 लाख से 75 लाख रुपये खर्च कर रही है, तो महज 1 साल के स्टाइपेंड के नाम पर इतना उपद्रव क्यों मचाया जा रहा है? 

जनता की जेब से भारी खर्च, फिर भी सड़कों पर हठधर्मिता

सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों और चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से रेखांकित की जा रही है कि मध्य प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जो मेडिकल की पढ़ाई के लिए छात्रों को 65 से 75 लाख रुपये तक की भारी वित्तीय सहायता व छात्रवृत्ति देता है। इसी कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी छात्र यहाँ मेडिकल की पढ़ाई करने आते हैं।

नागरिकों का कहना है कि:

केवल 1 साल की अवधि: इंटर्नशिप की अवधि केवल एक वर्ष की होती है और इन छात्रों ने अभी तक अपनी MBBS की डिग्री भी हासिल नहीं की है। जनता के पैसे का अनादर: पब्लिक मनी से 65 से 75 लाख रुपये की सहायता पाने के बावजूद ये छात्र महज एक साल के वजीफे या पॉकेट मनी के लिए जनता को मुसीबत में डाल रहे हैं और गरीब मरीजों का इलाज करने से पीछे हट रहे हैं। 

'स्टाइपेंड भत्ता है, जीवन-मरण का सवाल नहीं'

स्थानीय निवासियों का स्पष्ट मानना है कि इंटर्नशिप वजीफा एक प्रकार का भत्ता है, न कि कोई मौलिक अधिकार या जीवन-मरण का सवाल। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा 40 घंटे से भी अधिक समय से मुख्य सड़कों को ब्लॉक करके रखा गया है।

मंगलवार को भी स्थिति चिंताजनक बनी रही, जहाँ आम लोग और यहाँ तक कि रास्ते के लिए गिड़गिड़ाती महिलाओं को भी आगे बढ़ने नहीं दिया गया। छात्रों का अड़ियल रवैया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक रास्ता बंद रहेगा। इस पर गुस्सा जताते हुए भोपाल के नागरिकों ने कहा है कि जनता का सब्र अब टूट चुका है; यदि पुलिस बल कम पड़ता है तो आम जनता मदद करेगी, लेकिन इस तरह का सड़क जाम अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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