Edited By Himansh sharma, Updated: 25 Mar, 2026 04:08 PM

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ नगरपालिका खैरागढ़ में विवाह प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर सामने आए आंकड़ों ने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
खैरागढ़, (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ नगरपालिका खैरागढ़ में विवाह प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर सामने आए आंकड़ों ने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। महज साढ़े तीन माह की अवधि में 2744 विवाह प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला अब जिले के सबसे बड़े घोटालों में गिना जाने लगा है। जानकारी के अनुसार 25 नवंबर से फरवरी माह के बीच इतनी बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र जारी किए गए, जबकि स्थानीय स्तर पर इस अवधि में वास्तविक विवाहों की संख्या 50 से 60 के बीच बताई जा रही है। आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच यह भारी अंतर पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है।
निलंबन अवधि में जारी हुए दस्तावेज
मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब यह तथ्य सामने आया कि तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी के निलंबन काल के दौरान ही बड़ी संख्या में विवाह प्रमाण पत्र जारी किए गए। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासनिक नियंत्रण किसके हाथ में था और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर अथवा डिजिटल प्रमाणीकरण किस आधार पर किया गया।
सूत्रों का दावा है कि जांजगीर चांपा, धमतरी और बीजापुर जैसे अन्य जिलों के आवेदकों को भी खैरागढ़ नगरपालिका से विवाह प्रमाण पत्र जारी किए गए। नियमों के अनुसार संबंधित क्षेत्राधिकार में ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए। ऐसे में बाहरी जिलों के आवेदनों की स्वीकृति ने संदेह और गहरा दिया है।
अवैध वसूली और डिजिटल दुरुपयोग की आशंका
इस पूरे प्रकरण में हजारों रुपये की अवैध वसूली के आरोप भी सामने आ रहे हैं। कुछ आवेदकों ने अनौपचारिक रूप से स्वीकार किया है कि प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराने के नाम पर अतिरिक्त राशि मांगी गई।वहीं वेरिफायर आईडी और डिजिटल सिग्नेचर के संभावित दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संगठित डिजिटल हेराफेरी का रूप ले सकता है।
जिम्मेदारी से बचने की कोशिश
मामला उजागर होने के बाद नगरपालिका कार्यालय में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारी और कर्मचारी एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। कोई तकनीकी त्रुटि की बात कर रहा है तो कोई पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल का हवाला दे रहा है।
जिला निर्माण के बाद खैरागढ़ में यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक घोटाला माना जा रहा है। प्रशासन ने जांच के आदेश देने की बात कही है, लेकिन अब जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच कितनी निष्पक्ष होगी और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
फिलहाल विवाह प्रमाण पत्रों की संख्या, जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित लॉगिन आईडी की तकनीकी जांच शुरू किए जाने की तैयारी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह महज सिस्टम की खामी थी या फिर सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला।