Edited By Himansh sharma, Updated: 20 Jul, 2026 12:48 PM

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी ने केवल बड़े नेताओं की सभाओं और जनसंपर्क अभियान पर ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करने के लिए व्यापक माइक्रो मैनेजमेंट का मॉडल लागू किया है। इसी रणनीति के तहत पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और संगठन के अनुभवी पदाधिकारियों को शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भाजपा की तैयारियों के अनुसार प्रत्येक शक्ति केंद्र पर एक प्रभारी और एक संगठक की नियुक्ति की गई है। एक शक्ति केंद्र के अंतर्गत सामान्यतः चार से छह बूथ शामिल किए गए हैं। यानी औसतन पांच बूथों की चुनावी जिम्मेदारी दो वरिष्ठ नेताओं के हाथों में होगी। इनकी भूमिका कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने, मतदाता संपर्क अभियान को गति देने और मतदान दिवस तक संगठनात्मक गतिविधियों की लगातार निगरानी करने की रहेगी।
जिला भाजपा द्वारा जारी जिम्मेदारियों की सूची में दतिया नगर, दतिया ग्रामीण, बड़ौनी, भांडेर, इंदरगढ़ और सेंवढ़ा मंडलों के शक्ति केंद्रों को शामिल किया गया है। पार्टी ने ऐसे नेताओं को मैदान में उतारा है, जिन्हें संगठन और चुनावी प्रबंधन का लंबा अनुभव है। माना जा रहा है कि बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ नेतृत्व के अनुभव का पूरा लाभ लेने की रणनीति अपनाई गई है।
दतिया उपचुनाव में पार्टी की इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य हर बूथ पर सक्रिय संगठन तैयार करना, मतदाताओं तक सीधा संपर्क बढ़ाना और मतदान के दिन प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस बार चुनाव को केवल प्रचार अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि बूथ स्तर की मजबूत रणनीति के सहारे चुनावी बढ़त हासिल करने की तैयारी में है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह बूथ-केंद्रित माइक्रो मैनेजमेंट उपचुनाव के नतीजों में कितना असर दिखा पाता है।