Edited By meena, Updated: 17 Mar, 2026 08:01 PM

मध्यप्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सीट पर फिलहाल सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि विधायक के रूप में मुकेश मल्होत्रा बने रहेंगे या फिर उनके प्रतिद्वंद्वी रामनिवास रावत...
भोपाल : मध्यप्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सीट पर फिलहाल सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि विधायक के रूप में मुकेश मल्होत्रा बने रहेंगे या फिर उनके प्रतिद्वंद्वी रामनिवास रावत को मौका मिलेगा। इस पूरे मामले पर जल्द ही अंतिम फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
दरअसल, चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने के आरोप को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा था। इस पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में रामनिवास रावत को विधायक घोषित करने का भी निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए मुकेश मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में अपील दायर की है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जल्द होने वाली है और उसी के बाद यह तय होगा कि विजयपुर सीट पर आखिर किसका दावा मजबूत रहेगा।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है, क्योंकि यदि हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगती है तो विजयपुर विधानसभा सीट पर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।
किसका पलड़ा भारी
विजयपुर विधानसभा सीट के मामले में फिलहाल कानूनी स्थिति थोड़ी जटिल है, लेकिन मौजूदा हालात देखें तो दोनों पक्षों की स्थिति अलग-अलग आधार पर मजबूत दिखाई देती है।
रामनिवास रावत का पलड़ा क्यों भारी माना जा रहा है?
- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहले ही फैसला दे चुका है कि मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य है।
- हाईकोर्ट ने अपने आदेश में रामनिवास रावत को विधायक घोषित करने की बात भी कही थी।
- यानी निचली अदालत (हाईकोर्ट) का फैसला फिलहाल रावत के पक्ष में है।
मुकेश मल्होत्रा के पक्ष में क्या है?
- उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में चुनौती दे दी है।
- अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे (रोक) लगा देता है, तो मल्होत्रा की विधायकी फिलहाल बच सकती है।
अभी की स्थिति
- कानूनी रूप से हाईकोर्ट का फैसला लागू है, इसलिए तकनीकी तौर पर रामनिवास रावत का पलड़ा थोड़ा भारी माना जा रहा है।
- लेकिन अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही साफ होगा।