Edited By Himansh sharma, Updated: 03 Jun, 2026 03:48 PM

मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी में मंथन अंतिम दौर में पहुंच गया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी में मंथन अंतिम दौर में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अचानक दिल्ली दौरे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि भाजपा जल्द ही अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकती है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि प्रदेश संगठन संभावित नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को सौंप चुका है और अगले कुछ दिनों में अंतिम मुहर लग सकती है। इस बार सबसे दिलचस्प बात यह है कि भाजपा केवल संगठनात्मक संतुलन ही नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव और राष्ट्रीय राजनीति को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन कर रही है। इसी वजह से कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
कैलाश विजयवर्गीय सबसे मजबूत दावेदार?
राज्यसभा की दौड़ में सबसे चर्चित नाम मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का माना जा रहा है। संगठन और राष्ट्रीय राजनीति में लंबे अनुभव के कारण उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि विजयवर्गीय खुद भी राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक हैं। यदि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजती है तो यह मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा संदेश माना जाएगा।
नरोत्तम मिश्रा की भी मजबूत दावेदारी
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भी प्रमुखता से चर्चा में है। भाजपा संगठन और केंद्रीय नेतृत्व में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ब्राह्मण चेहरे के रूप में उनकी उपयोगिता और संसदीय मामलों की समझ उन्हें अन्य दावेदारों से अलग बनाती है।
संघ से जुड़े नामों पर भी नजर
भाजपा के निर्णय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। इसी कारण अभय महाजन और महेश शर्मा जैसे नाम भी चर्चा में हैं। आदिवासी और संगठनात्मक संतुलन को देखते हुए इन नामों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
महिला और OBC समीकरण भी अहम
पूर्व मंत्री रंजना बघेल, अरविंद भदौरिया, अखंड प्रताप सिंह और जीएस डामोर भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में बताए जा रहे हैं। पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है, इसलिए अंतिम सूची में चौंकाने वाले नाम भी सामने आ सकते हैं।
दिल्ली में होगी अंतिम मुहर
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व जल्द सभी राज्यों के उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम फैसला ले सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली दौरा भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी अनुभव, संगठन या सामाजिक समीकरण किसे प्राथमिकता देती है। फिलहाल सियासी संकेत यही हैं कि राज्यसभा की दो सीटों के लिए भाजपा के भीतर मुकाबला बेहद दिलचस्प है और अंतिम सूची आने तक कई बड़े नाम चर्चा में बने रहेंगे।