Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Apr, 2026 12:51 PM

मध्य प्रदेश के श्योपुर में बाढ़ राहत घोटाले पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है।
श्योपुर: मध्य प्रदेश के श्योपुर में बाढ़ राहत घोटाले पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। वर्ष 2021 की बाढ़ के दौरान जरूरतमंदों के लिए जारी की गई राहत राशि में गड़बड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने इस बहुचर्चित घोटाले में शामिल 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब पुलिस गिरफ्तारी की तैयारी में जुट गई है।
यह मामला बड़ौदा तहसील से जुड़ा हुआ है, जहां जांच में सामने आया कि बाढ़ पीड़ितों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की राहत राशि का गलत वितरण किया गया। प्रशासन की इस मंजूरी के बाद बड़ौदा पुलिस जल्द ही आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
बताया जा रहा है कि इन पटवारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं—420 (धोखाधड़ी), 467 और 468 (जालसाजी), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत केस दर्ज है। ऐसे में कानूनी शिकंजा और कसना तय माना जा रहा है।
इस घोटाले की जड़ वर्ष 2021 की बाढ़ है, जब श्योपुर जिले में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। सरकार द्वारा राहत राशि वितरण के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि असली पीड़ितों को दरकिनार कर फर्जी नामों पर लगभग 2 करोड़ 57 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।
इस पूरे मामले में तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को मुख्य आरोपी बनाया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही मामले ने फिर से गति पकड़ी। कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें ग्वालियर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जहां वे फिलहाल शिवपुरी जेल में बंद हैं।
घोटाले में कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें 28 पटवारी भी शामिल थे। अब 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद कार्रवाई का दायरा और स्पष्ट हो गया है। इनमें मेवाराम गोरछिया, हेमंत मित्तल, राजकुमार शर्मा, महेंद्र सिंह जाटव, सुमित देशलेहरा, योगेश जिंदल, विनोद भूषण, अखिलेश जैन, भोलाराम गुप्ता, हुकुम बिसारिया, राजवीर जाटव, बृजराज मीणा, रामनरेश जाट, रामदयाल जागा, सोनेराम धाकड़, नीतेश मीणा, संजय रावत और शंकरलाल मार्सकोले शामिल हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, अब इन आरोपियों के खिलाफ न सिर्फ आपराधिक कार्रवाई होगी, बल्कि विभागीय जांच और निलंबन जैसी कार्रवाई भी शुरू हो सकती है। यह मामला साफ संकेत देता है कि सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों पर अब सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। श्योपुर का यह घोटाला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आपदा के समय भी भ्रष्टाचार किस हद तक सिस्टम में घुस चुका है। फिलहाल सभी की नजर अब पुलिस की अगली कार्रवाई और गिरफ्तारी पर टिकी हुई है।