Edited By Desh Raj, Updated: 04 Apr, 2026 05:32 PM

भ्रष्टाचार के खिलाफ जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के सिंह ने सिंघम एक्शन लिया है। भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार करते हुए महज एक ही हफ्ते में जांच का नतीजा आ गया और सीएमएचओ CMHO को निलंबित कर दिया गया
जबलपुर( विवेक तिवारी): भ्रष्टाचार के खिलाफ जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के सिंह ने सिंघम एक्शन लिया है। भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार करते हुए महज एक ही हफ्ते में जांच का नतीजा आ गया और सीएमएचओ CMHO को निलंबित कर दिया गया ।भ्रष्टाचार की फाइलें अब सरकारी दफ्तरों में धूल के नीचे दबी नहीं रहेगी, जहां पर भ्रष्टाचार पाया जाएगा वहां पर सीधा प्रहार किया जाएगा । जबलपुर कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने कुछ ऐसा ही किया है। सिर्फ एक हफ्ते में भ्रष्टाचार की जांच होना और सीधे चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर संजय मिश्रा का निलंबित करना यह साबित करता है कि जनहित के खिलाफ जिले में कुछ भी गलत हुआ तो कलेक्टर जबलपुर सीधा प्रहार अधिकारियों पर करेंगे।
कलेक्टर के सख्त रुख और निष्पक्ष जांच ने मचाया हड़कंप
दरअसल कलेक्टर के सख्त रुख और निष्पक्ष जांच के बाद 93 लाख के फर्जी देयकों के भुगतान मामले में राज्य शासन ने जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा को निलंबित कर दिया है। फर्जी देयक भुगतान की शिकायत कि सत्यता की जांच के लिए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा जांच दल गठित किया था। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में घोटाले को सही पाया और मामले में सीएमएचओ पर भुगतान रिपोर्ट को अनदेखा करने का आरोप लगाया।
कलेक्टर के प्रतिवेदन के आधार भोपाल मुख्यालय से निलंबन आदेश जारी किए गए। इस पूरे मामले में सरकारी खजाने को करोडों रुपये की चपत लगाने के साथ ही महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के गायब होने की पुष्टि हुई है। जांच में पाया गया कि विभागीय स्तर पर वित्तीय नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई और बिना सामग्री प्राप्त किए ही निजी कंपनियों को भुगतान कर दिया गया।
कलेक्टर की जांच से भ्रष्टाचार बेपर्दा
कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में फर्जी देयक लगाकर भुगतान किये जाने के प्रकरण में दोषी पाये जाने पर स्टोर कीपर का दायित्व संभाल रहे फार्मासिस्ट नीरज कौरव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। वही इसी मामले में संविदा आधार पर नियुक्त जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी एवं फार्मासिस्ट जवाहर लोधी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से हटाकर जांच पूरी होने तक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिहोरा में पदस्थ किया है।
एसडीएम ने की थी पूरी जांच
कलेक्टर द्वारा फर्जी देयकों (Fake Bills) के माध्यम से साईनेज निर्माण तथा स्वास्थ्य केन्द्र सामग्री के नाम से भोपाल की निजी कंपनी को बिना सामग्री प्राप्त हुए भुगतान किये जाने की शिकायतें प्राप्त होने पर डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी के नेतृत्व में जांच दल गठित किया था। जिसने अपनी जांच में सभी आरोपियों की संलिप्तता पाई थी।जांच में पाया गया था 12 फर्जी देयकों के माध्यम से भोपाल की सिंह एंटरप्राइजे़ज को साइनेज एवं स्वास्थ्य केन्द्र सामग्री के नाम से 93 लाख 04 हजार 998 रूपये का भुगतान किया जा चुका है। जबकि, भौतिक रूप से यह सामग्री प्राप्त ही नहीं हुई थी।