Edited By Himansh sharma, Updated: 29 Mar, 2026 12:29 PM
नया वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होते ही सैलरी स्ट्रक्चर से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं।
भोपाल: नया वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होते ही सैलरी स्ट्रक्चर से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। 1 अप्रैल से प्रभावी होने वाले इन बदलावों का सीधा असर नौकरीपेशा लोगों की इन-हैंड सैलरी पर पड़ सकता है। भले ही आपकी CTC (कुल पैकेज) पहले जैसी ही रहे, लेकिन हर महीने मिलने वाली राशि घट सकती है।दरअसल, अब तक कंपनियां सैलरी पैकेज में कई तरह के भत्तों और सुविधाओं के जरिए टैक्स बचाने का विकल्प देती थीं। लेकिन नए नियमों में इन “ग्रे एरिया” को खत्म करते हुए कई सुविधाओं को सीधे टैक्स के दायरे में लाया गया है।
किन सुविधाओं पर लगेगा टैक्स?
अब कंपनी द्वारा दी जाने वाली कई सुविधाएं आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ेंगी, जैसे: कंपनी का घर (शहर के अनुसार तय प्रतिशत पर टैक्स) ,लंबे समय तक होटल में रहने का खर्च ,कंपनी की गाड़ी का निजी इस्तेमाल (ड्राइवर होने पर टैक्स और ज्यादा)
बिजली-पानी का बिल, घरेलू नौकर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई का भत्ता (सीमा से अधिक),त्योहारों पर मिलने वाले महंगे गिफ्ट, क्लब मेंबरशिप और कंपनी कार्ड से निजी खर्च ,इन सभी को अब स्पष्ट रूप से टैक्सेबल माना जाएगा।
कंपनियां बदलेंगी सैलरी स्ट्रक्चर
इन नियमों के लागू होने के बाद कई कंपनियां अपने कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर फिर से तैयार कर सकती हैं। कई भत्ते हटाए जा सकते हैं या उन्हें सीधे सैलरी में जोड़ा जा सकता है। इससे टैक्सेबल इनकम बढ़ेगी और इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है। साथ ही, नए लेबर कोड के तहत बेसिक सैलरी को कुल CTC का कम से कम 50% रखना जरूरी होगा। इससे PF और ग्रेच्युटी में कटौती बढ़ेगी—जो भविष्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन फिलहाल हाथ में आने वाली रकम कम कर सकता है।
पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था—क्या चुनें?
अगर आपकी सैलरी में HRA, 80C निवेश और अन्य छूट ज्यादा हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था अभी भी फायदेमंद हो सकती है। लेकिन यदि कंपनी भत्तों को कम कर देती है, तो नई टैक्स व्यवस्था सरल और बेहतर विकल्प बन सकती है। सही निर्णय के लिए दोनों का तुलनात्मक हिसाब जरूरी है।
1 अप्रैल से पहले क्या करें?
अपनी CTC का पूरा ब्रेकअप समझें
देखें कौन-कौन सी सुविधाएं अब टैक्सेबल होंगी
पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स कैलकुलेट करें
जरूरत हो तो HR या फाइनेंस टीम से सलाह लें
ध्यान रखें:
टैक्स की दरें भले नहीं बदली हैं, लेकिन नियमों में बदलाव आपकी सैलरी पर असर डाल सकते हैं। इसलिए अप्रैल की सैलरी स्लिप देखकर हैरान न हों—अभी से तैयारी कर लेना बेहतर रहेगा।