दिग्विजय सिंह पर सवाल उठाना पड़ा भारी! कांग्रेस ने दिग्गज नेता को भेजा शो-कॉज नोटिस

Edited By Himansh sharma, Updated: 03 Jul, 2026 05:59 PM

congress acts over social media remarks

प्रदेश कांग्रेस संगठन का कहना है कि दोनों नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंच पर की गई टिप्पणियां पार्टी की अनुशासन व्यवस्था और संगठनात्मक मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाने वाली कांग्रेस नेता निधि चतुर्वेदी के खिलाफ पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है। इसी के साथ महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका किरार को भी सोशल मीडिया पर संगठन विरोधी टिप्पणी करने के मामले में नोटिस भेजा गया है।

प्रदेश कांग्रेस संगठन का कहना है कि दोनों नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंच पर की गई टिप्पणियां पार्टी की अनुशासन व्यवस्था और संगठनात्मक मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

निधि चतुर्वेदी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर दिग्विजय सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि यदि किसी वरिष्ठ नेता को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के किसी फैसले या बयान पर आपत्ति थी, तो उसे सार्वजनिक करने के बजाय संगठन के भीतर उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की छवि कमजोर होती है और इसका राजनीतिक लाभ विरोधियों को मिलता है।

अपनी पोस्ट में निधि ने यह भी दावा किया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और अंदरूनी खींचतान ने पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस को लगातार नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से संगठनात्मक अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपनाने की मांग की।

वहीं, महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका किरार को भी सोशल मीडिया पर अपने जिला कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी करने के मामले में नोटिस जारी किया गया है। पार्टी का मानना है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को संगठन के भीतर के मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाने से बचना चाहिए।

लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। राजनीतिक गलियारों में अब सभी की नजर इस बात पर है कि दोनों नेताओं के जवाब के बाद पार्टी आगे क्या कदम उठाती है।

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