दतिया चुनाव के बाद कांग्रेस में भूचाल! घनश्याम और राजेंद्र भारती ने खोले एक-दूसरे के चौंकाने वाले सियासी 'राज'

Edited By Himansh sharma, Updated: 01 Aug, 2026 01:01 PM

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मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सार्वजनिक हो गई है।

दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सार्वजनिक हो गई है। चुनावी नतीजों से पहले ही पार्टी के दो प्रमुख नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने एक-दूसरे पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं, जिससे पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह ने दावा किया कि चुनाव अभियान के दौरान उन्हें अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनका आरोप है कि पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने चुनाव में सक्रिय समर्थन देने के बजाय विरोधी रणनीति अपनाई। घनश्याम सिंह ने यह भी कहा कि भाजपा से जुड़े लोगों के माध्यम से चुनावी गतिविधियों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया और इस पूरे मामले की शिकायत कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने पार्टी से राजेंद्र भारती के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की।

दूसरी ओर, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने घनश्याम सिंह को कायर और डरपोक बताते हुए कहा कि संभावित हार की आशंका के चलते उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। भारती का कहना है कि चुनावी हालात को देखते हुए अब हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ा जा रहा है।

राजेंद्र भारती ने विवाद को और आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि उपचुनाव लड़ने का फैसला भी पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सहमति से लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रबंधन और संसाधनों की व्यवस्था में भी भाजपा से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका रही। भारती ने यह भी कहा कि घनश्याम सिंह शुरुआत में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे।

दतिया उपचुनाव में सामने आए इन परस्पर आरोपों ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। अब सभी की नजर कांग्रेस नेतृत्व पर है कि वह इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और संगठनात्मक स्तर पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

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