किसान अब चिंता मुक्त होकर जमा कर करें कृषि ऋण- CM मोहन, अगले 5 वर्षों में दुग्ध उत्पादन में नम्बर-1 होगा MP

Edited By Desh Raj, Updated: 06 Jul, 2026 10:33 PM

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 जुलाई को ग्वालियर में उन्नत कृषि पर आयोजित संभागीय कार्यशाला में सम्मिलित हुए। यह कार्याशाला डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित की गई थी।

(भोपाल/ग्वालियर): मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 जुलाई को ग्वालियर में उन्नत कृषि पर आयोजित संभागीय कार्यशाला में सम्मिलित हुए। यह कार्याशाला डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित की गई थी। इसमें सीएम डॉ. मोहन ने किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी केवल एक फसल से नहीं, बल्कि बहु फसलों एवं उन्नत पशुपालन से बढ़ेगी। इस बात को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा उन्नत व प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हम अगले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन में नम्बर वन राज्य बनायेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में मूर्तरूप लेने जा रही अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का भी रिमोट से भूमिपूजन किया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगभग 13 करोड़ रुपए की लागत से ग्वालियर के खुरैरी एवं ग्राम जहांगीरपुर में इस हाईटेक नर्सरी के प्रथम चरण का कार्य होने जा रहा है। उन्होंने उद्यानिकी, मत्स्य पालन एवं कृषि से जुड़े अन्य विभागों की योजनाओं के तहत विभिन्न किसानों को हितलाभ भी वितरित किए।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार नेशनल डेयरी विकास योजना के तहत ग्वालियर दुग्ध संघ सहित सांची दुग्ध उत्पादन संघ को भरपूर मदद दे रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 2023 के बाद सिंचाई रकबे में बड़ी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2003 में प्रदेश का सिंचाई रकबा मात्र साढ़े 7 लाख हैक्टेयर था जो अब बढ़कर लगभग 50 लाख हैक्टेयर हो गया है। इसे हम 100 लाख हैक्टैयर तक ले जाएंगे। चंबल-पार्वती-काली सिंध एवं केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओ के माध्यम से यह संभव हुआ। उन्होंने इन परियोजनाओं की मंजूरी के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

किसान अब चिंता मुक्त होकर जमा कर सकते हैं कृषि ऋण

किसानों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश के कृषकों को 31 मार्च तक ऋण जमा करने की चिंता नहीं रही है। सरकार ने अब उन्हें ऋण जमा करने के लिये पूरे एक साल का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार द्वारा सभी प्रकार के कृषि उत्पादों व पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की सहूलियतों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ माता कभी आवारा नहीं हो सकती। इसी भाव के साथ प्रदेश सरकार द्वारा गौ संरक्षण एवं स्वदेशी गाय पालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने इसी कड़ी में नगरीय क्षेत्रों में निराश्रित गायों को बंद करने के लिये कार्यरत खिड़क प्रणाली को समाप्त कर दिया है और बड़े पैमाने पर गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। साथ ही देशी गायों में नस्ल सुधार के प्रयास भी प्रमुखता से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला की तरह प्रदेश के महानगर इंदौर, उज्जैन, जबलपुर व भोपाल में बड़ी गौशालाओं की स्थापना की जा रही है।

जैविक व प्राकृतिक खेती पर किसानों ने किए अनुभव साझा

उन्नत कृषि पर आयोजित हुई संभागीय कार्यशाला में कृषकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी कृषकों को अपने पास बुलाया और उत्साहवर्धन किया। ग्वालियर जिले के ग्राम बिलौआ निवासी उन्नत कृषक प्राण सिंह माथुर ने कहा कि वे अपने छोटे से कृषि फार्म में सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने पांच नए किस्म के पौधों की खोज की है, जिसे वैज्ञानिक स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। उनके द्वारा ईजाद किए गए अमरूद की “बिलौआ-22” व “बिलौआ-रेड” किस्म पेटेंट हो चुकी हैं। प्राण सिंह अब तक 50 हजार से अधिक कृषकों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं। इसी तरह ग्राम देवरा निवासी बृजेन्द्र रावत ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर पूरी तरह प्राकृतिक खेती को अपना लिया है। उन्नत प्राकृतिक खेती के लिए उनकी धर्मपत्नी को राष्ट्रीय स्तर पर पांच अवार्ड मिल चुके हैं।

समन्वित कृषि प्रणाली, बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाइयों का लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली इकाई एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई का लोकार्पण भी किया। किसानों के लिए आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी खेती का व्यावहारिक मॉडल कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। इस “समन्वित कृषि प्रणाली इकाई” में फसल उत्पादन, बागवानी, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियों को एकीकृत किया गया है। इस मॉडल में एक गतिविधि का अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए रॉ मटेरियल बनता है, जिससे लागत घटती है। साथ ही संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को आय के अनेक स्रोत प्राप्त होते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वितरित किए हेलमेट

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सड़क सुरक्षा के उपहार स्वरूप जिले के लगभग 50 लोगों को हेलमेट वितरित किए। साथ ही सभी से आग्रह किया कि हेलमेट पहनकर वाहन चलाएं और दूसरों को भी इसके लिये प्रेरित करें। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा के लिये अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली के तहत मॉडल स्वरूप बनाए गए बहुउद्देश्यीय तालाब में जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दाने डालकर तालाब के दूसरे छोर पर तैर रहीं बतखों को पुकारा तो बतखें उनके नजदीक आ गईं और बड़े चाव के साथ दानों को खाया। उल्लेखनीय है कि इस तालाब को कृषि विश्वविद्यालय परिसर के भवनों से जुड़ीं वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं से भरा जाता है। तालाब के ऊपर एक बड़ा मुर्गी पालन बॉक्स बनाया गया है। मुर्गियों के चूज़ों की बीट इस तालाब में गिरती है जिसे मछलियां व बतखें खाती हैं। इस प्रकार एक संरचना से सफलतापूर्वक मुर्गी, मछली व बतख पालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत आम का पौधा रोपा। उन्होंने इस अवसर पर वृहद स्तर पर पौधे रोपने और उनकी सुरक्षा करने का आह्वान किया।

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