झुलसे चेहरे और टूटे हाथ के बावजूद नहीं टूटा सपना! मनीष गुप्ता ने 492 अंक लाकर MP बोर्ड में मारी बाजी, टॉप 10 में बनाई जगह

Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Apr, 2026 06:46 PM

from tragedy to triumph manish gupta lands in mp top 10 with 492 marks

ज़िंदगी कभी-कभी ऐसी परीक्षा लेती है, जिसमें हार मान लेना आसान होता है.. लेकिन कुछ लोग वही होते हैं जो हालात से लड़कर अपनी कहानी खुद लिखते हैं।

सीधी (सूरज शुक्ला): ज़िंदगी कभी-कभी ऐसी परीक्षा लेती है, जिसमें हार मान लेना आसान होता है.. लेकिन कुछ लोग वही होते हैं जो हालात से लड़कर अपनी कहानी खुद लिखते हैं। मझौली क्षेत्र के छोटे से गांव दादर (जोगी पहरी) के होनहार छात्र मनीष गुप्ता ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है।

बचपन में एक हादसे में उनके चेहरे का एक हिस्सा और एक हाथ झुलस गया था। यह हादसा किसी भी बच्चे का आत्मविश्वास तोड़ सकता था, लेकिन मनीष ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दर्द को ताकत में बदलते हुए उन्होंने पढ़ाई को अपना हथियार बनाया—और आज उसी मेहनत का नतीजा है कि उन्होंने मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में 500 में से 492 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में 8वां स्थान प्राप्त किया है।

यह सिर्फ एक शानदार परिणाम नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक की एक जीवंत कहानी है।मनीष एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता विकास गुप्ता खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता मीरा गुप्ता गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मनीष ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। दिन-रात की मेहनत और मजबूत इरादों ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

मनीष ने संदीपनी विद्यालय पथरौला से अपनी शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्हें प्राचार्य शैलेंद्र सिंह और शिक्षकों चंद्रदेव श्रीवास्तव, रमेश सिंह चौहान और ज्ञानेंद्र सिंह परिहार का मार्गदर्शन मिला। मनीष अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देते हैं।

पढ़ाई के साथ-साथ मनीष में एक और खास हुनर है—गायन। उनकी मीठी आवाज सुनने वाले हर किसी का मन मोह लेती है। यानी पढ़ाई के साथ-साथ कला में भी वे पीछे नहीं हैं।मनीष की इस उपलब्धि पर वैश्य महासम्मेलन जिला इकाई सीधी ने उनका सम्मान किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

आज मनीष गुप्ता सिर्फ एक टॉपर नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो मुश्किल हालातों में भी अपने सपनों को जिंदा रखते हैं। सच यही है—हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हौसले बुलंद हों तो सफलता झुककर सलाम करती है।

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