Edited By Himansh sharma, Updated: 15 Apr, 2026 03:03 PM

मध्यप्रदेश में नए वित्तीय वर्ष के साथ लागू हुई नई आबकारी नीति ने शराब कारोबार को लेकर कई बड़े संकेत दिए हैं।
भोपाल। मध्यप्रदेश में नए वित्तीय वर्ष के साथ लागू हुई नई आबकारी नीति ने शराब कारोबार को लेकर कई बड़े संकेत दिए हैं। सरकार ने एक तरफ जहां नई शराब दुकानें नहीं खोलने का फैसला लिया है, वहीं दूसरी ओर राजस्व में 10 से 12 फीसदी बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या आम उपभोक्ता को इस साल महंगी शराब का सामना करना पड़ेगा?
नई नीति के बड़े फैसले
राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेशभर में एक भी नई शराब दुकान नहीं खुलेगी। फिलहाल कुल 3553 दुकानों का ही संचालन होगा। इसके साथ ही धार्मिक स्थलों के आसपास लागू शराबबंदी को भी जारी रखा गया है, जिससे सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
नर्मदा किनारे सख्ती जारी
नई नीति में नर्मदा नदी के तट से 5 किलोमीटर के दायरे में शराब दुकानों पर प्रतिबंध को भी बरकरार रखा गया है। यह फैसला पहले की तरह इस बार भी लागू रहेगा, जिससे धार्मिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखा गया है।
मोनोपॉली खत्म, छोटे समूहों में बंटे ठेके
इस बार सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए शराब ठेकों को छोटे-छोटे समूहों में बांट दिया है। उदाहरण के तौर पर, भोपाल में पहले जहां 4 समूह थे, अब उन्हें बढ़ाकर 20 कर दिया गया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि इससे बड़े व्यापारियों की पकड़ कमजोर होगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
क्या बढ़ेंगे शराब के दाम?
सरकार ने फिलहाल पूरे प्रदेश में शराब के रेट नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है, लेकिन ठेकों की लागत में करीब 20% तक बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत का असर उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि नीति लागू होने के बाद आमतौर पर कीमतों में बदलाव नहीं किया जाता, फिर भी बीच साल में संशोधन की गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकार की कमाई पर फोकस
आबकारी विभाग पहले से ही राज्य के सबसे बड़े राजस्व स्रोतों में शामिल है। पिछले साल के मुकाबले इस बार 10-12% अधिक आय का अनुमान लगाया गया है, जो सरकार की आर्थिक रणनीति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
अवैध शराब पर उठे सवाल
नई नीति के बीच अवैध शराब के कारोबार को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कार्रवाई अक्सर छोटे स्तर के लोगों तक सीमित रहती है, जबकि असली नेटवर्क तक पहुंच नहीं बन पाती। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। नई आबकारी नीति में सरकार ने संतुलन बनाने की कोशिश की है—एक ओर सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता, तो दूसरी ओर राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य। फिलहाल शराब के दाम स्थिर हैं, लेकिन बाजार की स्थिति और नीतिगत बदलावों पर नजर रखना जरूरी होगा।