Edited By Himansh sharma, Updated: 25 May, 2026 10:53 AM

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रायपुर: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल कंपनियों ने 25 मई से पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया है। लगातार बढ़ते रेट के बाद अब छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पेट्रोल ₹109 प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। इस महीने यह चौथी बार है जब ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया है।राजधानी रायपुर में पेट्रोल की कीमत ₹107.96 प्रति लीटर दर्ज की गई है। भले ही रायपुर प्रदेश के बाकी कई जिलों की तुलना में थोड़ा राहत वाला क्षेत्र माना जा रहा हो, लेकिन लगातार हो रही बढ़ोतरी ने यहां भी वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है। रोजाना दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, छोटे कारोबारी और निजी वाहन उपयोग करने वाले लोग अब सीधे तौर पर इसका असर महसूस कर रहे हैं।
प्रदेश के दूरस्थ जिलों में हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहे हैं। नारायणपुर में पेट्रोल ₹109.65 प्रति लीटर, जगदलपुर ₹109.64, दंतेवाड़ा ₹109.60 और बीजापुर ₹109.59 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं सरगुजा संभाग में भी पेट्रोल के रेट लगातार ऊंचे बने हुए हैं। जशपुर ₹109.52, सूरजपुर ₹109.39 और अंबिकापुर ₹109.09 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच चुका है।हालांकि कोरबा में प्रदेश का सबसे कम पेट्रोल रेट ₹107.63 प्रति लीटर दर्ज हुआ, लेकिन यहां भी कीमतें आम उपभोक्ताओं के लिए राहत देने वाली स्थिति में नहीं हैं। दुर्ग, धमतरी, महासमुंद और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में भी रेट लगातार ऊपर बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूरस्थ जिलों में ट्रांसपोर्टेशन लागत ज्यादा होने और सप्लाई चेन महंगी होने के कारण वहां ईंधन की कीमतें अधिक दिखाई देती हैं। दूसरी ओर बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर वितरण व्यवस्था होने से कुछ अंतर देखने को मिलता है। ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रह गया है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर आने वाले दिनों में रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है। यात्री किराए में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है।
दरअसल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकार का वैट और डीलर कमीशन जोड़ने के बाद अंतिम कीमत तय होती है। यही वजह है कि हर राज्य और हर जिले में पेट्रोल-डीजल के रेट अलग दिखाई देते हैं।
बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक तनाव के कारण तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है। यदि आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट नहीं आती, तो पेट्रोल-डीजल के दाम में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बढ़ती फ्यूल कीमतों ने आम आदमी के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है और लोग आने वाले दिनों में राहत का इंतजार कर रहे हैं।