Edited By Desh Raj, Updated: 30 Mar, 2026 11:49 PM

मध्य प्रदेश में लंबे समय से पेंडिग पड़े सहकारिता चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। सरकारें आती रही और जाती रही लेकिन ये चुनाव किसी न किसी तरह टलते ही रहे। लेकिन अब 50 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव होने...
(भोपाल): मध्य प्रदेश में लंबे समय से पेंडिग पड़े सहकारिता चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। सरकारें आती रही और जाती रही लेकिन ये चुनाव किसी न किसी तरह टलते ही रहे। लेकिन अब 50 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव होने उम्मीद जगी है।
2013 में हुए थे सहकारिता चुनाव
वहीं जब जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक प्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र में आने वाली साख समितियों और सहकारी बैंकों के चुनाव इस साल के अंत में कराने की खबर मिल रही है। सरकार ने इस दिशा में अपने स्तर पर तैयारी भी शुरू कर दी है। इसके साथ ही भाजपा संगठन भी इन चुनावों को लेकर अपनी स्थिति का आंकलन करने में जुट गया है। जानकारी है कि कृषि कल्याण वर्ष के दौरान सहकारिता के चुनाव कराकर किसानों को पदों पर बैठाने का तोहफा सीएम मोहन दे सकते हैं।
गौर करने वाली बात है कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2013 को राज्य की 4,523 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति और 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के चुनाव कराए गए थे। इसी वर्ष सहकारिता के चुनाव कराए जाने थे, लेकिन विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव के कारण चुनाव टाल दिए गए। वहीं जानकार कहते है कि सरकार न जानबूझकर यह चुनाव नहीं कराए, क्योंकि तब सत्तासीन भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार की किसान कर्ज माफी योजना को बंद कर दिया था।
अब किसानों के बीच पकड़ मजबूत करने की कवायद
सूत्रों का कहना है कि अब सरकार चाहती है कि सहकारी चुनाव कराकर अपनी किसानों के मध्य अपनी पकड़ को और मजबूत किया जा सके। जानकारों की मानें तो सरकार चाहती है कि प्रदेश में पंचायती राज चुनाव से पहले सहकारिता और कृषि उपज मंडी के चुनाव करा दिए जाएं
आपको बता दें कि प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव अंतिम बार 2013 में हुए थे और कार्यकाल 2018 तक चला था। लेकिन विधानसभा चुनाव, किसान कर्ज माफी और दूसके कारणों से यह चुनाव टलते ही रहे। कांग्रेस और शिवराज सरकारों के कार्यकाल में भी यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।