Edited By Desh Raj, Updated: 22 Mar, 2026 05:23 PM

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के अथक प्रयासों से राज्य की अर्थव्यवस्था 2026-27 में 18.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जायेगी। राज्य के बजट प्रावधानों को देखते हुए उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
(भोपाल): मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के अथक प्रयासों से राज्य की अर्थव्यवस्था 2026-27 में 18.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जायेगी। राज्य के बजट प्रावधानों को देखते हुए उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। वर्ष 2025-26 में जीएसडीपी 16.48 लाख करोड़ रुपये रही जो अब बढ़ रही है। राज्य की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये के बजट में विकास, सामाजिक सुरक्षा और अधोसंरचना विस्तार को केंद्र में रखा है। सरकार के प्रयासों से स्पष्ट है कि वित्तीय वर्ष के अंत में 44 करोड़ रुपये का राजस्व आधिक्य रहेगा।
बजट में अधोसंरचना और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए 80 हजार 266 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया गया है। यह राज्य के जीएसडीपी का 4.80 प्रतिशत है। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों, शहरी अधोसंरचना और ग्रामीण विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।
विकास योजनाओं को गति देने के लिए कई प्रमुख विभागों के आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। ग्रामीण विकास विभाग के बजट में 37 प्रतिशत, नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 16 प्रतिशत, महिला एवं बाल विकास विभाग में 26 प्रतिशत, राजस्व विभाग में 43 प्रतिशत और स्कूल शिक्षा विभाग में 11 प्रतिशत की वृद्धि होगी। आगामी वर्ष में ग्रामीण आधारभूत संरचना, शहरी सुविधाओं और सामाजिक क्षेत्र को मजबूत बनाया जाएगा।
किसान समृद्धि
कृषि और किसानों के कल्याण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 88 हजार 910 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। गैर-बजटीय संसाधनों को सम्मिलित करने पर इस क्षेत्र के लिए कुल लगभग 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि गतिविधियों को आधुनिक बनाने में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी ।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार की प्रमुख योजना लाड़ली बहना योजना के लिए इस बजट में लगभग 23 हजार 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वीबीजी राम जी योजना के लिए लगभग 10 हजार 400 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए लगभग 5 हजार 500 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए लगभग 4 हजार 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आगामी सिंहस्थ आयोजन की तैयारियों के लिए भी लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित है।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए इस वर्ष 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। वहीं सामाजिक और आर्थिक उत्थान से जुड़ी योजनाओं के लिए 1 लाख 83 हजार 708 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 26 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 17 प्रतिशत राशि निर्धारित है।
बजट में नई दीर्घकालिक योजनाओं की भी घोषणा की गई है। द्वारका योजना के तहत अगले तीन वर्षों में 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। स्वामित्व योजना के लिए 3 हजार 800 करोड़ रुपये तथा यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन गतिविधियों को बल मिलेगा। राज्य की राजकोषीय स्थिति के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियां 3 लाख 8 हजार 703 करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जबकि पूंजीगत प्राप्तियां 80 हजार 694 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
वर्ष 2026-27 में अधोसंरचना विकास, कृषि सशक्तिकरण, महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को गति देने के साथ राज्य की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की रणनीति पर काम होगा। विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।