BJP नेता और पूर्व MLA के निधन से समर्थकों में दुख, अंतिम संस्कार के दौरान माहौल हुआ गमगीन, बेटे ने दी मुखाग्नि

Edited By Desh Raj, Updated: 15 Mar, 2026 06:41 PM

grief among supporters following the demise of bjp leader and former mla

मध्यप्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक यादवेन्द्र सिंह का शनिवार को निधन हो गया था। काफी समय तक बीमार रहने के बाद वो  14 मार्च को पंचतत्व में विलीन हो गए थे। उनका निधन भोपाल के एक निजी अस्पताल में हुआ था

(सतना):  मध्यप्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक यादवेन्द्र सिंह का शनिवार को निधन हो गया था। काफी समय तक बीमार रहने के बाद वो  14 मार्च को पंचतत्व में विलीन हो गए थे। उनका निधन भोपाल के एक निजी अस्पताल में हुआ था। यादवेंद्र सिंह की पार्थिव देह  देर रात गृहग्राम पहुंची थी और आज रविवार को गृह ग्राम में उनका अंतिम संस्कार हुआ।

यादवेंद्र सिंह का कचनार गांव में अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान उनकी अंतिम यात्रा में राज्यमंत्री, सांसद, विधायक से लेकर भारी संख्या में लोग शामिल हुए । उनके बेटे यतेन्द्र सिंह 'पप्पू' ने यादवेन्द्र सिंह की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान माहौल काफी भावुक और दर्दभरा हो गया।

माहौल रहा गमगीन

73 वर्ष की आयु में यादवेन्द्र सिंह ने अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। पार्थिव देह गृह ग्राम कचनार पहुंची तो हर आंखों में आंसू थे।  बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व भाजपा नेता कचनार गांव पहुंचे थे। कचनार हाउस में यादवेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सांसद गणेश सिंह, विधायक नागेन्द्र सिंह, से लेकर कई जनप्रतिनिधियों उन्हें श्रद्धांजलि दी।

काफी समय से बीमार थे

नागौद क्षेत्र के लोकप्रिय नेता और पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह का शनिवार को भोपाल के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। 

एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

यादवेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था। यादवेंद्र सिंह ने संघर्ष और मेहनत के दम पर कार्यकर्ता से नेता तक का लंबा और कठिन सफर तय किया। यही वजह रही कि वे हमेशा कार्यकर्ताओं के नेता के रूप में पहचाने जाते थे। कहा जाता था कि जो भी व्यक्ति उनके दरवाजे तक पहुंच जाता, उसकी समस्या को वे गंभीरता से सुनते और तत्काल निराकरण के लिए प्रयास करते थे। हजारों-लाखों कार्यकर्ताओं के लिए यादवेंद्र सिंह एक मजबूत साया माने जाते थे और उन्हें कार्यकर्ताओं का मसीहा भी कहा जाता था।

उन्होंने आजाद प्रत्याशी के तौर 1998 में चुनाव लड़ा और फिर वो कांग्रेस, BSP से होते हुए BJP में पहुंचे थे। साल 2018 में कांग्रेस ने उनको टिकट नहीं दिया तो वो बीएसपी में शामिल हो गए और फिर 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी का दामन थाम लिया था।

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