Edited By Desh Raj, Updated: 18 Feb, 2026 02:25 PM

BJP के पूर्व विधायक और प्रसिद्ध कवि सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनुप्रिया ने पिछले कल कांग्रेस को ज्वाइन करके राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। हर कोई हैरान था कि पिता भाजपा का नेता और बेटी ने कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया।कनुप्रिया ने कहा कि वो...
(डेस्क):BJP के पूर्व विधायक और प्रसिद्ध कवि सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनुप्रिया ने पिछले कल कांग्रेस को ज्वाइन करके राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। हर कोई हैरान था कि पिता भाजपा का नेता और बेटी ने कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया। लेकिन अब कनुप्रिया के पिता सत्यनारायण सत्तन ने बेटी के कांग्रेस को ज्वाइन करने को उनकी निजी विचार बताया है।
कनुप्रिया बोली-वो इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व से प्रभावित हैं
कनुप्रिया सत्तन ने कांग्रेस को ज्वाइन करने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि वो बचपन से ही पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के ओजस्वी व्यक्तित्व से प्रभावित रही हैं। कनुप्रिया ने कहा कि वो कांग्रेस के सेवाभावी आदर्शों से प्रभावित रही हूं। कनुप्रिया का कहना है कि वे इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व से इतनी प्रभावित हैं कि कांग्रेस को ज्वाइन किया।
कांग्रेस ज्वाइन करने से पहले कनुप्रिया प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी से भी मिलीं थी। कनुप्रिया के इस कदम की सियासत में खासी चर्चा हो रही है। पिता सत्तन का कहना है, कांग्रेस की डूबती नैया में बैठकर वह नदी पार करना चाहती है तो यह उसका फैसला है।
कांग्रेस ज्वाइन करने से पहले बेटी ने नहीं की कोई चर्चा
सत्यनारायण सत्तन ने कहा कि मेरे पिताजी भी कट्टर कांग्रेसी थे, लेकिन मैने जनसंघ ज्वाइन की, आरएसएस ज्वाइन की, पिता ने डांटा, मैने डांट सुन ली, लेकिन जो मेरी विचारधारा थी उस पर ही अडिग रहा। इसलिए किसी को विचारधारा पर रोक लगाने मेरा कोई विचार नहीं है।
सत्तन ने कहा कि मेरी बेटी खुद पत्रकार रही है, वह हर बात को समझती है, यदि उसने कांग्रेस ज्वाइन की है तो यह उसकी विचारधारा है। उसके कांग्रेस ज्वाइन करने से पिता पुत्री में कोई मतभेद नहीं होगा, ऐसे कई परिवार है जहां कोई कांग्रेस में है तो कोई बीजेपी में है।
कौन सा बाप है जो अपने बच्चों की विकास नहीं चाहता-सत्तन
सत्तन ने कहा है कि ऐसा कौन सा बाप है जो अपने बच्चों की उन्नति नहीं चाहता वह अपनी पार्टी में आगे बढ़े हम यही चाहते है। यदि वह मुझसे कहती कि बीजेपी में कोई पद दिलवा दो तो शायद मैं नहीं दिलवा पाता। जिस जो कहना है कहे, लेकिन उसे जो सही लगा होगा वो उसने किया है।