Edited By Desh sharma, Updated: 28 Jan, 2026 04:16 PM

छतरपुर जिले में देर रात हुई तेज बारिश और आंधी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी फसलें हवा और पानी के तेज झोंकों से गिर गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है, जो कई जगह जमीन पर बिछ गई...
छतरपुर (राजेश चौरसिया): छतरपुर जिले में देर रात हुई तेज बारिश और आंधी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी फसलें हवा और पानी के तेज झोंकों से गिर गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है, जो कई जगह जमीन पर बिछ गई है।
कर्ज लेकर बोई थी फसल, अब चुकाने का सहारा भी खत्म..
पीड़ित किसान दयाराम यादव ने बताया कि उन्होंने करीब 19 बीघा जमीन में चना, गेहूं, धनिया और मटर की खेती की थी। बारिश के कारण गेहूं की फसल जगह-जगह गिर गई है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ा है। किसान पहले से ही सरकारी कर्ज में था, वहीं इस बार खेती के लिए 2 से 2.5 लाख रुपये का अतिरिक्त कर्ज लिया। किसान क्रेडिट कार्ड का कर्ज भी अब तक बकाया है।
बेटी की पढ़ाई और शादी का सपना टूटा..
दयाराम यादव भावुक होकर बताते हैं कि बेटी की पढ़ाई पर हर साल 50 से 60 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस बार उन्होंने सोचा था कि फसल बेचकर कर्ज चुकाएंगे और बेटी की शादी करेंगे, लेकिन बारिश ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं। किसान का कहना है कि बेटी पढ़ी-लिखी है, इसलिए वह उसकी शादी किसी अच्छे और पढ़े-लिखे परिवार में करना चाहता है। ऐसी शादी में 8 से 10 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जो अब असंभव लग रहा है।
परिवार की स्थिति भी कमजोर
किसान के एक बेटा और दो बेटियां हैं। बेटा मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चला रहा है। एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी बेटी 12वीं की पढ़ाई कर रही है और उसकी शादी अभी बाकी है।
सरकार से मुआवजे की मांग..
किसान दयाराम यादव ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि बारिश से हुए नुकसान का सर्वे कर मुआवजा दिया जाए, ताकि वे कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियों से उबर सकें।