MP में कैबिनेट मंत्री पर भारी पड़ गए राज्यमंत्री, कैबिनेट मिनिस्टर के लिखे 4 पत्र भी नहीं करवा सके काम

Edited By Desh sharma, Updated: 24 Jan, 2026 06:46 PM

in madhya pradesh the minister of state has prevailed over the cabinet minister

मध्य प्रदेश में राज्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री पर भारी पड़ गए हैं। राज्यमंत्री का एक ऐसा काम हो गया जो कैबिनेट मंत्री का नहीं हो सका। इस खबर के फैलते ही राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई।

(भोपाल): मध्य प्रदेश में राज्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री पर भारी पड़ गए हैं। राज्यमंत्री का एक ऐसा काम हो गया जो कैबिनेट मंत्री का नहीं हो सका। इस खबर के फैलते ही राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। इस पूरे मामले में गौर करने वाली एक अहम बात ये भी है कि कैबिनेट मंत्री के 4 पत्र लिखने के बाद भी काम सिरे नहीं चढ़ा और राज्यमंत्री बाजी मार ले गए।

राज्य मंत्री मोहन नागर का हुआ काम,नारायण कुशवाह लिखते रहे पत्र

दरअसल राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त मोहन नागर ने जन अभियान परिषद के लिए सरकारी बंगला आवंटित करवा लिया जबकि कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह इसके लिए पत्र ही लिखते रह गए। गृह विभाग ने 45 बंगला क्षेत्र स्थित ई-8 सरकारी बंगला जन अभियान परिषद को आवंटित कर दिया।  मंत्री नारायण सिंह कुशवाह उसी बंगले को राज्य सामान्य वर्ग कल्याण आयोग के लिए आवंटित कराने के लिए जोर लगाते रह गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

चार चिट्ठियां  लिखने के बाद भी कैबिनेट मंत्री का नहीं हुआ काम

हैरानी की बात है कि नारायण सिंह कुशवाह ने गृह अपर मुख्य सचिव के नाम चार चिट्ठियां भी लिखीं, लेकिन कैबिनेट मंत्री का रुतवा यहां साबित नही हुआ और सब बेकार  हो गया। दरअसल रंग महल चौराहे के पास ई-8 का बंगला सामान्य वर्ग कल्याण आयोग को आवंटित था और आयोग के पदेन अध्यक्ष भी नारायण सिंह कुशवाह हैं। जब उन्हें पता चला कि बंगले की आवंटन अवधि खत्म हो गई है तो उन्होंने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बंगला को फिर से आयोग के लिए आवंटित करने का अनुरोध किया। कैबिनेट मंत्री के पत्रों को कोई असर नहीं हुआ और गृह विभाग ने 25 नवंबर को ये बंगला परिषद को आवंटित कर दिया।

खाली होने पर करना था कब्जा, उससे पहले ही ताला

गृह अवर सचिव के नाम से जारी आदेश में परिषद को तीन साल के लिए आवंटित करने का जिक्र है,  लेकिन शर्त यह है कि आवंटन खाली होने पर कब्जा करना था। लेकिन परिषद अधिकारियों ने  आयोग के बंगला खाली करने से पहले ही बंगले के एक हिस्से में ताला लगा दिया और रंग-रोगन भी शुरू करा दिया। हालांकि बंगले के एक हिस्से में अभी भी आयोग कार्यालय चल रहा है। फिलहाल ये मामला काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। कैबिनेट मंत्री के चार पत्र भी वो काम नहीं कर सके जो राज्यमंत्री का हो गया।

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