Edited By Himansh sharma, Updated: 26 Sep, 2026 05:11 PM

मध्यप्रदेश में अगले नगरीय निकाय चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले नगरीय निकाय चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन करते हुए उम्मीदवारों की जमानत राशि, नामांकन प्रक्रिया और चुनावी खर्च का लेखा-जोखा रखने से जुड़े प्रावधानों को नए सिरे से निर्धारित किया है। नए नियमों का असर महापौर, नगरपालिका एवं नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों पर पड़ेगा। संशोधित प्रावधानों के तहत अब चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को पहले की तुलना में अधिक जमानत राशि जमा करनी होगी। महापौर पद के प्रत्याशी के लिए जमानत राशि बढ़ाकर 32 हजार रुपये कर दी गई है। वहीं नगरपालिका अध्यक्ष के पद पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को 24 हजार रुपये जमा करने होंगे। नगर निकाय चुनाव में पार्षद पद के उम्मीदवारों पर भी संशोधित चुनावी नियम लागू होंगे।
नामांकन प्रक्रिया में भी बदलाव
नए नियमों में नामांकन दाखिल करने की अवधि को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। चुनाव से संबंधित सूचना प्रकाशित होने के बाद नामांकन के लिए कम से कम सात दिन का समय रखा जाएगा। सातवां दिन यदि सार्वजनिक अवकाश पड़ता है तो नामांकन की अंतिम तारीख अगले कार्यदिवस तक बढ़ जाएगी। इससे उम्मीदवारों को नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के लिए निर्धारित न्यूनतम समय मिल सकेगा।
एक पद के लिए एक उम्मीदवार द्वारा एक से अधिक नामांकन-पत्र जमा किए जाने की स्थिति में अब एक से ज्यादा नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्वाचन अधिकारी अतिरिक्त नामांकन-पत्र को स्वीकार नहीं करेगा।
चुनाव लड़ने वालों के लिए अलग बैंक खाता अनिवार्य
संशोधित नियमों में चुनावी खर्च को पारदर्शी बनाने पर खास जोर दिया गया है। महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के प्रत्याशियों को चुनाव से संबंधित लेन-देन के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में अलग और स्वतंत्र बैंक खाता खोलना होगा।
नामांकन-पत्र दाखिल करते समय उम्मीदवार को इस बैंक खाते की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को उपलब्ध करानी होगी। चुनाव के दौरान होने वाली संबंधित प्राप्तियों और खर्च का रिकॉर्ड इसी खाते के माध्यम से रखना होगा।
नामांकन से मतगणना तक खर्च का रिकॉर्ड
उम्मीदवारों को सिर्फ बैंक खाते की जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें चुनावी खर्च का पूरा लेखा-जोखा भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत करना होगा। इसमें नामांकन-पत्र दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख तक चुनाव से संबंधित किए गए खर्च को शामिल किया जाएगा। खर्च का हिसाब रखने के साथ उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने होंगे। निर्धारित अवधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कार्रवाई की जा सकती है। नियमों का पालन नहीं करने वाले उम्मीदवार को निर्धारित अवधि के लिए चुनाव लड़ने से निरर्हित भी किया जा सकता है।
पद रिक्त होने पर भी तय रहेगी प्रक्रिया
संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने से जुड़ी प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा यदि किसी महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का पद मृत्यु, इस्तीफा, निर्वाचन रद्द होने अथवा किसी अन्य कारण से रिक्त होता है, तो इसकी सूचना निर्धारित समय-सीमा के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। इन बदलावों के साथ आगामी नगरीय निकाय चुनाव में नामांकन से लेकर चुनावी खर्च तक उम्मीदवारों के लिए नियम पहले से अधिक स्पष्ट और दस्तावेज आधारित हो गए हैं। खास तौर पर अलग बैंक खाते और खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था से प्रत्याशियों के चुनावी लेन-देन का हिसाब निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज रहेगा।