MP में अतिथि विद्वानों का सियासी दांव! ‘विद्वान जनता पार्टी’ का ऐलान, मंत्री के गृह क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी

Edited By Himansh sharma, Updated: 20 Sep, 2026 04:39 PM

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अतिथि विद्वानों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक सरकार के स्तर पर समाधान की उम्मीद की, लेकिन उनकी प्रमुख मांगें अब भी लंबित हैं।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में अतिथि विद्वानों के आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। कॉलेजों में लंबे समय से नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और रोजगार की स्थिरता की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे अतिथि विद्वानों ने अब राजनीतिक मैदान में उतरने का फैसला किया है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने ‘विद्वान जनता पार्टी’ (VJP) के गठन का ऐलान किया है। उनका कहना है कि लगातार आश्वासनों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण अब वे अपनी आवाज विधानसभा तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से जुड़ा कथित बयान अहम माना जा रहा है। अतिथि विद्वानों के अनुसार, जब उन्होंने अपनी नौकरी और नियमितीकरण से जुड़ी मांगों को लेकर मंत्री के सामने अपनी बात रखी, तब उन्हें कथित तौर पर चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की चुनौती दी गई। इसके बाद भोपाल में मंत्री के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने इसी चुनौती को स्वीकार करने का ऐलान कर दिया।

आंदोलन से सीधे चुनावी मैदान तक

अतिथि विद्वानों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक सरकार के स्तर पर समाधान की उम्मीद की, लेकिन उनकी प्रमुख मांगें अब भी लंबित हैं। ऐसे में आंदोलन को राजनीतिक मंच देने का फैसला किया गया है। प्रस्तावित विद्वान जनता पार्टी के जरिए न केवल अतिथि विद्वानों, बल्कि अस्थायी और संविदा व्यवस्था में काम कर रहे अन्य शिक्षाकर्मियों की समस्याओं को भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी है। इस मुहिम में महिला अतिथि विद्वानों की भागीदारी भी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे आगामी चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे।

मंत्री के गृह क्षेत्र से चुनावी चुनौती की तैयारी

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि अतिथि विद्वानों ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के गृह क्षेत्र सुजालपुर से चुनावी मुकाबले की तैयारी का ऐलान किया है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया तो वे चुनाव के जरिए अपना पक्ष जनता के सामने रखेंगे। प्रदर्शनकारियों ने अपने अभियान में सत्तारूढ़ दल पर राजनीतिक कटाक्ष भी शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया और प्रदर्शन से जुड़े पोस्टरों में चुनावी प्रतीकों के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

‘फॉल-आउट’ व्यवस्था पर सबसे बड़ी नाराजगी

अतिथि विद्वानों की सबसे बड़ी शिकायत कॉलेजों में लागू ‘फॉल-आउट’ व्यवस्था को लेकर है। उनका कहना है कि किसी कॉलेज में नियमित प्रोफेसर की नियुक्ति या स्थानांतरण होने पर संबंधित विषय में कार्यरत अतिथि विद्वान की सेवाएं समाप्त हो सकती हैं। इससे वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों के सामने अचानक रोजगार का संकट खड़ा हो जाता है। शिक्षकों की मांग है कि सेवा में निरंतरता सुनिश्चित की जाए और नियुक्ति, स्थानांतरण तथा नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट एवं स्थायी नीति बनाई जाए।

पुराने आश्वासनों का भी मुद्दा

अतिथि विद्वानों का आरोप है कि उन्हें पहले भी नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से आश्वासन मिलते रहे हैं। उनका दावा है कि वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की ओर से भी उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर आश्वासन दिए गए, लेकिन वे अपनी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

अब अतिथि विद्वानों ने आंदोलन की दिशा बदलते हुए राजनीतिक विकल्प अपनाने का संकेत दिया है। ‘विद्वान जनता पार्टी’ के गठन की घोषणा के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संगठन केवल विरोध-प्रदर्शन तक सीमित रहता है या वास्तव में आगामी चुनाव में उम्मीदवार उतारकर मध्य प्रदेश की सियासत में अपनी औपचारिक एंट्री करता है।

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