Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Sep, 2026 04:41 PM

मध्यप्रदेश बीजेपी में निगम-मंडल, बोर्ड और विकास प्राधिकरणों की नियुक्तियों का सिलसिला आगे बढ़ने के साथ ही पार्टी के भीतर पदों को लेकर खींचतान भी तेज होती दिखाई दे रही है।
भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश बीजेपी में निगम-मंडल, बोर्ड और विकास प्राधिकरणों की नियुक्तियों का सिलसिला आगे बढ़ने के साथ ही पार्टी के भीतर पदों को लेकर खींचतान भी तेज होती दिखाई दे रही है। सरकार और संगठन ने अब तक कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां कर दी हैं, लेकिन राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर से जुड़े दो अहम विकास प्राधिकरणों में फैसला अभी भी अटका हुआ है।इन दोनों प्राधिकरणों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद भरे जाने हैं। खास बात यह है कि इन पदों के लिए दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक भोपाल और इंदौर, दोनों जगह करीब 20-20 नेताओं के नाम दावेदारी में बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि संगठन के लिए नाम तय करना आसान नहीं हो रहा है।
पहले से कई नेताओं को मिल चुकी जिम्मेदारी
प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच सहमति के बाद अब तक निगम, मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में बड़ी संख्या में नियुक्तियां हो चुकी हैं। करीब 34 अध्यक्ष और 14 उपाध्यक्ष बनाए जा चुके हैं। इसके बावजूद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ता अभी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
नियुक्तियों के साथ एक और मुद्दा नेताओं की बेचैनी बढ़ा रहा है। जिन लोगों को जिम्मेदारी मिल चुकी है, उनमें से कई को अभी तक मंत्री स्तर का दर्जा नहीं मिला है। ऐसे में पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि पद मिलने के बाद अधिकार और प्रोटोकॉल का इंतजार आखिर कब खत्म होगा।
भोपाल-इंदौर पर सबसे ज्यादा नजर
भोपाल और इंदौर दोनों ही राजनीतिक और प्रशासनिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण शहर हैं। विकास प्राधिकरणों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद को लेकर इसलिए भी खासी दिलचस्पी है क्योंकि इन पदों को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। सूत्रों की मानें तो अलग-अलग गुटों के प्रभावशाली नेता अपनी पसंद के नाम आगे बढ़ा रहे हैं। किसी एक नाम पर सहमति बनाने में यही सबसे बड़ी चुनौती बन रही है। पार्टी नेतृत्व भी जल्दबाजी में ऐसा फैसला नहीं लेना चाहता, जिससे किसी दूसरे खेमे में नाराजगी पैदा हो।
सीएम और प्रदेश अध्यक्ष कर चुके हैं मंथन
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा कर चुके हैं। संगठन के सामने चुनौती सिर्फ पद भरने की नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की भी है। एक तरफ लंबे समय से इंतजार कर रहे नेताओं को समायोजित करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे चेहरों को जिम्मेदारी देने की कवायद है, जिनसे पार्टी को राजनीतिक और संगठनात्मक लाभ मिल सके।
चार पदों पर टिकी निगाहें
भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के कुल चार पदों पर अब बीजेपी के कई नेताओं की नजर है। यही चार पद फिलहाल पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं। दावेदारों की लंबी सूची ने नेतृत्व की मुश्किल बढ़ा दी है।
अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व किसे इन महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंपता है और किन दावेदारों को अभी और इंतजार करना पड़ता है। फिलहाल भोपाल और इंदौर के इन चार पदों पर फैसला टलना ही इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर समीकरण साधना आसान नहीं है।