Edited By Himansh sharma, Updated: 07 Sep, 2026 02:08 PM

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए खेती को मुनाफे का कारोबार बनाने की दिशा में सरकार ने नई तैयारी शुरू की है।
भोपाल: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए खेती को मुनाफे का कारोबार बनाने की दिशा में सरकार ने नई तैयारी शुरू की है। अब सिर्फ फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि उसके बेहतर दाम, प्रोसेसिंग और बाजार तक पहुंच पर भी फोकस किया जा रहा है। प्रदेश में प्याज और लहसुन के विशेष क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वहीं किसानों की उपज खराब होने से बचाने के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की व्यवस्था भी है।
दरअसल, सब्जियों के बाजार भाव में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए सरकार उत्पादन को मांग के हिसाब से व्यवस्थित करने की तैयारी में है। इसी कड़ी में प्याज और लहसुन के क्लस्टर विकसित किए जाने हैं। किसानों को इन फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की योजना भी प्रस्तावित है। उद्यानिकी संचालनालय ने क्लस्टर विकास का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसके साथ ही अलग-अलग जिलों में फल, सब्जी और फूलों के उत्पादन के लिए विशेष क्लस्टर विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
सरकार का अगला फोकस खेत से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करने पर है। यानी किसान की फसल सिर्फ मंडी तक नहीं जाएगी, बल्कि जरूरत के मुताबिक उसकी प्रोसेसिंग भी की जाएगी।फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने पर पात्र इकाइयों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इससे फल और सब्जियों से पल्प, पाउडर और फ्लेक्स जैसे उत्पाद तैयार कर बड़े बाजारों तक पहुंचाने और निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने पर जोर है।
वहीं शहरों के आसपास सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर आधारित खेती पर भी जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत सब्जी उत्पादक किसानों को निर्धारित इकाई लागत के आधार पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। अधिकतम अनुदान 24 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक है।
सरकार ने सिर्फ खेती और प्रोसेसिंग तक ही योजना सीमित नहीं रखी है। किसानों को उनकी खास फसलों की पहचान दिलाने के लिए अलग-अलग शहरों में महोत्सव भी आयोजित किए जा रहे हैं। भोपाल में आम महोत्सव के बाद सितंबर में बुरहानपुर में केला महोत्सव, अक्टूबर में इंदौर में सब्जी महोत्सव और नवंबर में ग्वालियर में अमरूद महोत्सव आयोजित किया जाना है।
इसके अलावा दिसंबर में ग्वालियर में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला और सेमिनार भी प्रस्तावित है। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर भी विकसित किया जा रहा है। मंदिरों और धार्मिक स्थलों के आसपास फूलों के क्लस्टर विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है।
सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यानी मध्यप्रदेश में खेती का फोकस अब सिर्फ ज्यादा उत्पादन पर नहीं, बल्कि बेहतर बीज, क्लस्टर खेती, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर बढ़ाया जा रहा है। अगर इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो प्याज, लहसुन, फल, सब्जी और फूल उत्पादक किसानों को अपनी उपज के बेहतर मूल्य दिलाने में मदद मिल सकती है।