Edited By Himansh sharma, Updated: 07 Sep, 2026 01:13 PM

मध्य प्रदेश कैडर की 2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या एक बार फिर चर्चा में हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश कैडर की 2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका तबादला ही नहीं, बल्कि तबादले के बाद IAS एसोसिएशन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आया उनका भावुक पोस्ट है। मारव्या ने अपनी पोस्ट में कार्यस्थल पर कथित अनुशासनहीनता, दबाव और असुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। राज्य सरकार ने शनिवार को नेहा मारव्या को आदिम जाति विकास विभाग से हटाकर अजाक वित्त विकास निगम में नई जिम्मेदारी दी है। इससे पहले उन्हें डिंडौरी कलेक्टर के पद से भी कार्यकाल पूरा होने से पहले हटा दिया गया था। लगातार प्रशासनिक बदलावों के बीच अब उनके बयान ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
‘मेरी टेबल पर हाथ पटककर तबादले की धमकी दी’
अपने पोस्ट में IAS नेहा मारव्या ने दावा किया कि उनके अधीन काम करने वाले कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ कथित तौर पर अनुशासनहीन व्यवहार किया। उन्होंने लिखा कि विरोध करने वाले अधीनस्थ उनकी टेबल पर हाथ पटककर उन्हें तबादला करवाने तक की धमकी दे चुके हैं। मारव्या के मुताबिक, उन्होंने संबंधित अधिकारियों के व्यवहार, फाइलों को रोके जाने और कथित दुर्व्यवहार को लेकर शिकायतें भी की थीं। उनका आरोप है कि शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई होने के बजाय उनका ही तबादला कर दिया गया।
‘एक IAS अधिकारी खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करे?’
नेहा मारव्या ने अपने पोस्ट में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाया। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी के अधीनस्थ ही उसके खिलाफ इस तरह दबाव बना सकें कि उसका तबादला हो जाए, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था में क्या संदेश जाएगा। उन्होंने लगातार होने वाले तबादलों को लेकर भी निराशा जाहिर की। उनका कहना है कि किसी नई जिम्मेदारी और विभागीय कामकाज को समझने के बाद उसे प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का मौका मिलने से पहले ही स्थानांतरण हो जाता है।
एक साल में कई प्रशासनिक बदलाव
नेहा मारव्या के करियर में हाल के समय में लगातार प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिले हैं। डिंडौरी कलेक्टर के रूप में उनकी नियुक्ति भी ज्यादा लंबी नहीं चली और करीब आठ महीने बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। डिंडौरी में उनके कार्यकाल के दौरान कुछ स्थानीय राजनीतिक विवाद भी सामने आए थे। इसके बाद उन्हें कलेक्टर पद से हटाया गया। हालांकि, इन घटनाओं और तबादलों को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें रही हैं।
जनजातीय कार्य विभाग में भी सामने आए थे विवाद
आदिम जाति विकास विभाग में पदस्थापना के दौरान भी नेहा मारव्या को लेकर विभागीय स्तर पर मतभेद और विवाद की खबरें सामने आती रही हैं। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके कार्य करने के तरीके को लेकर आरोप लगाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि विभागीय बैठकों के दौरान कुछ अधिकारियों के साथ उनके व्यवहार को लेकर नाराजगी थी। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक और विस्तृत पक्ष अलग-अलग समय पर सामने आना जरूरी है।
कर्मचारियों की सुविधाओं से लेकर बजट तक उठे सवाल
विभागीय सूत्रों के हवाले से यह आरोप भी सामने आए कि मारव्या के कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की चाय जैसी नियमित सुविधाओं पर रोक लगाई गई थी। उनके खिलाफ विभागीय संसाधनों और वाहनों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए। इसके अलावा, बड़ी संख्या में अधिकारियों के वेतनवृद्धि यानी इंक्रीमेंट को लेकर भी असंतोष की बात कही गई। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारी का पक्ष महत्वपूर्ण है।
अब चर्चा में है IAS अधिकारी का पोस्ट
लगातार तबादलों और विभागीय विवादों के बीच नेहा मारव्या की सोशल मीडिया पोस्ट ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच पर अधीनस्थों के कथित दबाव और असुरक्षा की बात उठाए जाने से प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। अब सवाल यह है कि उनके लगाए आरोपों पर सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं। फिलहाल, नेहा मारव्या का यह पोस्ट मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच संबंधों को लेकर बहस का नया मुद्दा बन गया है।