Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Sep, 2026 07:41 PM

मध्यप्रदेश को अक्सर “अजब-गजब” मामलों के लिए जाना जाता है, लेकिन सहकारिता विभाग से सामने आया एक मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश को अक्सर “अजब-गजब” मामलों के लिए जाना जाता है, लेकिन सहकारिता विभाग से सामने आया एक मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। यहां एक अधिकारी को नौकरी के आखिरी दिन ही प्रमोशन मिला और उन्होंने नई पोस्ट का चार्ज भी संभाल लिया। खास बात यह रही कि सुबह जिस पद पर ज्वाइनिंग ली, उसी दिन शाम को उसी अधिकारी की सेवानिवृत्ति हो गई। मामला सहकारिता विभाग के अधिकारी सुरेश सांवले से जुड़ा है। बड़वानी में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के तौर पर सेवाएं दे रहे सांवले को शासन की ओर से प्रमोशन देकर ज्वाइंट रजिस्ट्रार बनाया गया था। प्रमोशन आदेश 27 जुलाई को जारी हुआ था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्होंने 31 अगस्त को इंदौर में ज्वाइंट रजिस्ट्रार के पद का कार्यभार संभाला।
11 बजे संभाला चार्ज, 5 बजे रिटायर
31 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे सुरेश सांवले इंदौर कार्यालय पहुंचे और तत्कालीन ज्वाइंट रजिस्ट्रार से नई जिम्मेदारी का चार्ज लिया। पदभार संभालने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों से मुलाकात और परिचय का दौर चलता रहा।
लेकिन इस नई जिम्मेदारी का समय बेहद छोटा साबित हुआ। घड़ी में शाम के 5 बजते ही उनकी करीब 30 साल लंबी सरकारी सेवा का सफर खत्म हो गया। यानी जिस पद पर उन्होंने सुबह कदम रखा, उससे उसी दिन शाम को विदाई भी हो गई।
प्रमोशन की प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर चर्चा छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब अधिकारी की सेवानिवृत्ति उसी दिन तय थी, तो प्रमोशन और पदभार ग्रहण की प्रक्रिया किस तरह और किस समय पूरी की गई?
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सुरेश सांवले ने नई जिम्मेदारी संभालने के दौरान कोई सरकारी आदेश जारी नहीं किया। उनका अधिकांश समय अधिकारियों-कर्मचारियों से परिचय और औपचारिक प्रक्रिया में बीता।
बड़वानी से इंदौर तक रहा कार्यकाल
सुरेश सांवले मूल रूप से बुरहानपुर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान इंदौर, बड़वानी और सेंधवा में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के तौर पर जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2016 से 2020 तक वे इंदौर में पदस्थ रहे। इसके बाद बड़वानी और सेंधवा में भी सेवाएं दीं।
करीब तीन दशक की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद 31 अगस्त को वे सेवानिवृत्त हो गए। लेकिन उनकी नौकरी के आखिरी दिन की सबसे खास बात यही रही कि रिटायरमेंट से कुछ घंटे पहले ही उन्हें प्रमोशन मिला और नई कुर्सी की जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला। छह घंटे की ज्वाइंट रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी अब सहकारिता विभाग के इस पूरे मामले को चर्चा में ला रही है।