किसानों को इस कारण होने वाला है करोड़ों का नुकसान, जानिए पूरी डिटेल

Edited By Himansh sharma, Updated: 06 Apr, 2026 04:02 PM

mp farmers face major losses as wheat exports stall and prices drop

मध्यप्रदेश में गेहूं उत्पादक किसानों को इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

भोपाल: मध्यप्रदेश में गेहूं उत्पादक किसानों को इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर राज्य में अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीदी शुरू नहीं हुई है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते गेहूं के निर्यात पर भी असर पड़ा है। इसका सीधा प्रभाव बाजार भाव पर दिख रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज MSP से काफी कम दामों पर बेचनी पड़ रही है।

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ा है। गेहूं के निर्यात में कमी आने से व्यापारियों की खरीद क्षमता प्रभावित हुई है, जिसके चलते वे किसानों को अपेक्षाकृत कम दाम दे रहे हैं। इस स्थिति में प्रदेश के किसानों को करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे उनमें नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

विदिशा जिले की कृषि उपज मंडी में हालात उस समय बिगड़ गए जब किसानों को गेहूं की उचित कीमत नहीं मिली। नाराज किसानों ने मंडी के सामने सड़क पर चक्का जाम कर दिया। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। किसानों का आरोप है कि व्यापारियों और अधिकारियों के बीच मिलीभगत के कारण उन्हें सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

टीकमगढ़ जिले में भी स्थिति कुछ ऐसी ही बनी हुई है। मंडी में इस बार किसानों की संख्या और गेहूं की आवक दोनों में गिरावट दर्ज की गई है। जहां पिछले वर्ष हजारों किसान मंडी पहुंचते थे, वहीं इस बार यह संख्या काफी कम रह गई है। आवक घटकर भी पिछले साल की तुलना में आधी से कम रह गई है।

गुना में भी गेहूं के कम दाम मिलने को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। यहां विरोध के दौरान यातायात प्रभावित हुआ और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। बाद में अधिकारियों और किसानों के बीच बातचीत के जरिए स्थिति को संभाला गया।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने गेहूं खरीदी की तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश के कुछ संभागों में 10 अप्रैल से MSP पर खरीद शुरू की जाएगी, जबकि बाकी क्षेत्रों में 15 अप्रैल से उपार्जन प्रारंभ होगा। इसके लिए 7 अप्रैल से स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष करीब 19 लाख से अधिक किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया है। प्रदेश में हजारों उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं और लगभग 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का अनुमान है। सरकार द्वारा इस बार MSP के साथ प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस भी देने की घोषणा की गई है।

हालांकि, खरीदी शुरू होने से पहले ही बाजार में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर किसानों की आय पर साफ दिखाई दे रहा है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकारी खरीद शुरू होने के बाद उन्हें राहत मिलेगी और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

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