Edited By Desh Raj, Updated: 12 Mar, 2026 08:46 PM

मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव से जुड़े विवाद के एक केस में बड़ा ही महत्वपूर्ण आदेश हुअ है। इस अहम मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कड़ा फैसला सुनाया है। हाइकोर्ट ने जनपद पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द करने का फैसला सुनाया है।
(जबलपुर): मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव से जुड़े विवाद के एक केस में बड़ा ही महत्वपूर्ण आदेश हुअ है। इस अहम मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कड़ा फैसला सुनाया है। हाइकोर्ट ने जनपद पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द करने का फैसला सुनाया है। दरअसल अदालत ने चुनाव के दौरान आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने को गंभीर माना है और सीधी जिले के एक जनपद सदस्य का चुनाव निरस्त करके कड़ा फैसला सुना दिया है। चुनाव को निरस्त करके अदालत ने उस पद के लिए दोबारा से चुनाव कराने का निर्देश भी दिया है। आपको बता दें कि यह मामला सीधी जिले की रामपुर नैकिन जनपद पंचायत के वार्ड क्रमांक-1 से संबधित है। निर्वाचित जनपद सदस्य ऋषिराज मिश्रा के चुनाव को अदालत ने अमान्य घोषित करके बड़ा झटका दे दिया है।
कोर्ट ने जानकारी छिपाना माना गंभीर अपराध
इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने अहम टिप्पणी देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बहुत ज्यादा जरूरी है। यदि कोई प्रत्याशी दर्ज आपराधिक मामलों या कोई महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाता है, तो यह मतदाताओं को गुमराह करना है।
याचिकाकर्ता राकेश पाण्डेय की याचिका पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। वर्ष 2022 में हुए पंचायत चुनाव में रामपुर नैकिन जनपद पंचायत के वार्ड क्रमांक-1 का ये मामला था।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि “नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण है। यह मतगणना से जुड़ा मामला नहीं है बल्कि ऐसा मामला है जिसमें प्रत्याशी द्वारा गलत जानकारी दी गई।”
पीठ ने कहा कि यदि नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी जाती है तो उसे उसी समय अस्वीकार किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता और नामांकन स्वीकार कर लिया जाता है तो इससे चुनाव परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने राज्य सरकार का आदेश रद्द करते हुए विजयी घोषित किए गए प्रत्याशी का चुनाव निरस्त किया। बता दें कि 14 जुलाई 2022 को ऋषिराज मिश्रा को सबसे अधिक वोट मिलने के कारण विजयी घोषित किया गया। दूसरे स्थान पर रहे राकेश पाण्डेय ने मामले को लेकर याचिका दायर की थी।