Edited By Vandana Khosla, Updated: 09 Apr, 2026 01:52 PM

जबलपुरः जबलपुर में स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक अब महिला गेस्ट फैकल्टी को भी 26 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा। जिसका असर उसके वेतन पर नहीं पड़ेगा। इस दौरान महिला गेस्ट फैकल्टी को पूरा वेतन...
जबलपुरः जबलपुर में स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक अब महिला गेस्ट फैकल्टी को भी 26 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा। जिसका असर उसके वेतन पर नहीं पड़ेगा। इस दौरान महिला गेस्ट फैकल्टी को पूरा वेतन मिलेगा। यह फैसला जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के नियमों के आधार पर सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि हर महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन पाने का अधिकार है।
यह मामला कटनी के सरकारी तिलक पीजी कॉलेज से जुड़ा हुआ है। जहां डॉ. प्रीति साकेत गेस्ट फैकल्टी के रूप में काम कर रहीं है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। शुरुआत में उन्हें 26 हफ्ते का मातृत्व अवकाश वेतन सहित दिया गया था। लेकिन बाद में, 16 जून 2023 को कॉलेज प्रशासन ने अपना आदेश बदल दिया और कहा कि अवकाश के दौरान उन्हें कोई मानदेय (पेमेंट) नहीं मिलेगा। इसी फैसले के खिलाफ डॉ. प्रीति साकेत ने कोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के अनुसार हर महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन मिलना चाहिए। प्रशासन का फैसला कानून के खिलाफ है और उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है। साथ ही यह भी कहा गया कि उन्हें उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण परेशान किया जा रहा है।
वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी कि गेस्ट फैकल्टी अस्थायी कर्मचारी होती है और नियमों के अनुसार उन्हें मानदेय देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए आदेश बदला गया। सभी पक्षों की बात सुनने के बाद हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारी के अधिकारों को प्राथमिकता दी और आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को 26 हफ्ते का सवैतनिक मातृत्व अवकाश दिया जाए।