Edited By Himansh sharma, Updated: 10 Jul, 2026 02:00 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी ने पुलिस हिरासत से जुड़े विवाद पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी।
इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी ने पुलिस हिरासत से जुड़े विवाद पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना ने स्वीकार किया कि वे करीब तीन साल पहले तक ड्रग्स की लत का शिकार थे, लेकिन रिहैब सेंटर में इलाज कराने के बाद उन्होंने पूरी तरह नशा छोड़ दिया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वर्तमान ड्रग्स तस्करी मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
नाना पटवारी ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी है कि वे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई हैं। उनका आरोप है कि इसी वजह से उन्हें अनावश्यक रूप से पुलिस हिरासत में लिया गया और पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई।
उन्होंने बताया कि जिस समय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, वे अपनी कार की सर्विसिंग कराने गए थे। इसके बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई, लेकिन पूरे दिन कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उनका कहना है कि देर रात पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
ड्रग्स मामले में गिरफ्तार आरोपियों से संबंध होने के सवाल पर नाना ने साफ कहा कि उनका किसी भी आरोपी से कोई आर्थिक या आपराधिक संबंध नहीं
है। उन्होंने बताया कि जिस सर्विस सेंटर में उनकी गाड़ी जाती थी, वहीं काम करने वाले कुछ लोगों के बारे में पुलिस ने पूछताछ की। जिस स्कॉर्पियो वाहन की चर्चा की जा रही है, वह भी उनकी नहीं, बल्कि सर्विस सेंटर संचालक की है और उसमें मिले किसी सामान से उनका कोई संबंध नहीं है।
वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेताओं और उनके परिवारों को दबाव में लाने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जीतू पटवारी ने कहा कि उनके भाई का ड्रग्स तस्करी के मामले से कोई संबंध नहीं है और बिना ठोस आधार के उन्हें हिरासत में लेकर परेशान किया गया।
गौरतलब है कि इंदौर की राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने गुरुवार को ब्राउन शुगर मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आए इनपुट के आधार पर नाना पटवारी को हिरासत में लिया था। हालांकि लंबी पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें देर रात बिना किसी गिरफ्तारी के छोड़ दिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।