रिश्वत लेते पकड़े गए पंचायत सचिव को 3 साल की सजा, PM आवास की किस्त खाते में डालने के लिए मांगे थे पैसे

Edited By Desh sharma, Updated: 06 Jan, 2026 10:37 PM

panchayat secretary caught accepting bribe has sentenced to 3 years in prision

छतरपुर में विशेष न्यायाधीश (लोकायुक्त) ने प्रधानमंत्री आवास की किस्त डालने के एवज में 4 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए ग्राम पंचायत कदारी के सचिव भरत वर्मा को 3 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है।

छतरपुर (राजेश चौरसिया): छतरपुर में विशेष न्यायाधीश (लोकायुक्त) ने प्रधानमंत्री आवास की किस्त डालने के एवज में 4 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए ग्राम पंचायत कदारी के सचिव भरत वर्मा को 3 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है।  

ग्राम पंचायत कदारी के सचिव भरत वर्मा ने मांगी थी रिश्वत

अभियोजन कार्यालय के अनुसार 18 मार्च 2019 को जगत यादव ने ग्राम पंचायत कदारी के सचिव भरत वर्मा के विरूद्ध 5 हजार रुपए की रिश्वत मांगने संबंधी शिकायत लोकायुक्त एसपी सागर से करते हुए बताया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसका आवास स्वीकृत हुआ था ।

इसके लिए राशि 1 लाख 50 हजार रूपये शासन द्वारा स्वीकृत हुई थी। उसे शासन से 1 लाख 20 हजार रू प्राप्त हुआ था शेष 30 हजार रू की राशि खाते में डालने के एवज में सचिव भरत वर्मा उससे 5 हजार रू की रिश्वत मांग रहा था। लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत माँग संबंधी बातचीत को 18 मार्च 2019 को वॉयस रिकार्डर में रिकार्ड करवाया। बातचीत के दौरान सचिव ने 5000 रू की मांग की एवं 1000 रू ले लिये एवं बाकी के 4000 रू लेकर बुलाया।

19 मार्च 2019 को लोकायुक्त ट्रेपदल ने छतरपुर में चौबे नर्सिंग होम के पास सचिव भरत वर्मा को जगत यादव से रिश्वत के रूप में लिए 4000 रू उसकी पेंट की दाहिनी जेब बरामद कर लिए। सचिव भरत वर्मा के दोनो हाथो की अगुलियो को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलाने पर घोल का रंग हल्का गुलाबी हो गया। विवेचना एवं अभियोजन स्वीकृति उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन की ओर से एडीपीओ अभिषेक मेहरोत्रा ने पैरवी करते हुये मामले के सभी सबूत एवं गवाह कोर्ट में पेश किये। विचारण उपरांत विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त/प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव, छतरपुर के न्यायालय ने आरोपी सचिव भरत वर्मा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 में 3 वर्ष का सश्रम कारावास व 5 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।

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