High Court का बड़ा फैसला,कहा-2 साल तक बनने वाले शारीरिक संबंध सहमति पर आधारित, रेप FIR निरस्त की

Edited By Desh Raj, Updated: 20 Mar, 2026 10:24 PM

physical relations sustained for two years deemed consensual high court

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने सहमति से शारीरिक संबंध बनाने को लेकर ये अहम फैसला दिया है। ये फैसला काफी गौर करने वाला माना जा रहा है। कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी महिला और पुरुष के बीच लंबे समय तक, विशेष तौर से दो सालों...

(जबलपुर): मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने सहमति से शारीरिक संबंध बनाने को लेकर ये अहम फैसला दिया है। ये फैसला काफी गौर करने वाला माना जा रहा है। कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी महिला और पुरुष के बीच लंबे समय तक, विशेष तौर से दो सालों तक लगातार शारीरिक संबंध बनते रहे हों, तो इस आधार पर इस संबंध को सहमति पर आधारित माना जाएगा।

सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि यदि आवेदक ने पीड़ित से विवाह का वादा किया था, लेकिन बाद में उसे पूरा नहीं किया, तो सामान्य परिस्थितियों में पीड़ित को चाहिए था कि वह ऐसे व्यक्ति से दूरी बना लेती और शारीरिक संबंध आगे जारी नहीं रखती।

लंबे समय तक संबंध जारी रखना सहमति का प्रतीक-कोर्ट

कोर्ट ने साफ किया कि  लंबे समय तक संबंध बनाए रखना इस बात की ओर इशारा करता है कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे। इसी आधार पर कोर्ट  ने गोहलपुर थाने में दर्ज रेप एफआईआर (FIR) को निरस्त कर दिया। आपको  यह बता दे कि मामला लंदन के डॉ. जितिन के. सेबेस्टियन से जुड़ा था, जिनके खिलाफ पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई थी।

अपनी शिकायत में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2021 में उसकी आवेदक से दोस्ती हुई थी। इसके बाद उससे विवाह का वादा किया और इस दौरान  उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए गए । लेकिन मामले में अहम मोड़ तब आया जब पीड़िता गर्भवती हो गई। उसके गर्भवती होते ही आवेदक अपने वादे से मुकर गया।

अपने साथ हुए इस कृत्य के चलते  पीड़िता ने गोहलपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। हाईकोर्ट ने सभी पहुलुओ और  परिस्थितियों की जांच करने के बाद पाया कि संबंध सहमति से बने हैं और ये रेप में नहीं आता है।

लिहाजा जबलपुर पीठ ने अहम फैसले में 2 वर्षों तक चले शारीरिक संबंधों को सहमति आधारित मानते हुए दुष्कर्म के मामले में दर्ज FIR को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि लंबे समय तक संबंध बनाए रखना आपसी सहमति की ओर संकेत करता है। फिलहाल यह एक बड़ा फैसला माना जा रहा है।

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