Edited By Himansh sharma, Updated: 11 Apr, 2026 10:25 PM

शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मी ही अब सुरक्षित नहीं हैं। बीती रात गुना के कैंट थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है
गुना (मिसबाह नूर): शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मी ही अब सुरक्षित नहीं हैं। बीती रात गुना के कैंट थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां बीच सड़क पर गाली-गलौज और हंगामा कर रहे युवकों को टोकना एक प्रधान आरक्षक को भारी पड़ गया। बेखौफ आरोपियों ने न केवल पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता की, बल्कि थप्पड़ मारकर उनकी पिटाई भी कर दी।
घटना शुक्रवार रात करीब 11 बजे की है। यातायात थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान उन्हें थाने के बाहर स्थित आस्था होटल के सामने से जोर-जोर से चिल्लाने और शोर-शराबे की आवाजें सुनाई दीं। जब वे मौके पर पहुंचे तो देखा कि 4-5 युवक आपस में गाली-गलौज कर रहे थे और सार्वजनिक स्थान पर उत्पात मचा रहे थे।
एक जिम्मेदार पुलिसकर्मी के नाते जब उन्होंने युवकों को शांत होने और वहां से जाने को कहा, तो नशे में धुत युवकों का गुस्सा भड़क गया। प्रधान आरक्षक की यह बात उन्हें नागवार गुजरी और तीन युवक सीधे उनके पास आकर गाली-गलौज करने लगे। जब पुलिसकर्मी ने उन्हें गंदी गालियां देने से रोका, तो आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने हाथापाई करते हुए थप्पड़ मारे, जिससे पुलिसकर्मी की गर्दन और पीठ में चोटें आई हैं।
वायरलेस पर गूंजी आवाज, मौके पर पहुंचे चीता जवान
मामला बिगड़ता देख घायल पुलिसकर्मी ने तुरंत वायरलेस पर कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना मिलते ही चीता मोबाइल पर तैनात प्रधान आरक्षक नवनीत श्रीवास्तव और शहबाज खान तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। पूछताछ में हमलावर युवकों की पहचान शिवलाल, विनोद और राजेंद्र निवासी ग्राम गणेशपुरा, थाना म्याना के रूप में हुई है।
वीडियो फुटेज आया सामने
इस पूरी घटना का वीडियो फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें युवकों की दबंगई साफ देखी जा सकती है। प्रधान आरक्षक की शिकायत पर कैंट थाना पुलिस ने तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। वर्दी पर हाथ उठाने वाले इन उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है कि जब पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा?