Edited By Desh sharma, Updated: 02 Jan, 2026 02:52 PM

नीमच जिले से भाजपा के लिए झटके वाली खबर है। यहां पर दिग्गज भाजपा नेता को हार का सामना करना पड़ा और निर्दलीय ने मैदान मार लिया। दरअसल जावद विधानसभा की तारापुर ग्राम पंचायत में चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल पर विराम लग गया है
(नीमच): नीमच जिले से भाजपा के लिए झटके वाली खबर है। यहां पर दिग्गज भाजपा नेता को हार का सामना करना पड़ा और निर्दलीय ने मैदान मार लिया। दरअसल जावद विधानसभा की तारापुर ग्राम पंचायत में चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल पर विराम लग गया है। उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार नेमीचंद धाकड़ ने जीत का परचम लहरा दिया है। धाकड़ ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार और पूर्व जिला महामंत्री सुखलाल सेन के बेटे पवन सेन को 91 मतों से हराकर सरपंच पद अपने नाम कर लिया है। नेमीचंद धाकड़ की इस जीत की सियासी गलियारों में काफी चर्चा हो रही है।
उपचुनाव में दांव पर थी साख
तारापुर ग्राम पंचायत का यह उपचुनाव बिल्कुल भी आम चुनाव नहीं था। ये तभी चर्चा में आ गया था जब कुछ महीने पहले पंचायत के 15 पंचों ने तत्कालीन सरपंच के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। 'खाली कुर्सी-भरी कुर्सी' प्रक्रिया के तहत हुए मतदान में 15 में से 12 पंचों ने तत्कालीन सरपंच के खिलाफ वोटिंग करके पद को छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था।
पवन सेन की हार को माना दा रहा बड़ा झटका
सरपंच पद के खाली होने के बाद मुजफ्फर भाई को अंतरिम सरपंच नियुक्त किया था। मुजफ्फर भाई ने करीब 4 माह तक कामकाज संभाला और फिर 28 दिसंबर को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ। इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ माना जा रहा था।
अब भाजपा समर्थित उम्मीदवार पवन सेन की हार को बड़ा झटका माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि पवन सेन का परिवार जिले की राजनीति में अलग स्थान रखता है। इतना रसूख और प्रभाव होने के बाद भी नेमीचंद धाकड़ ने 91 वोटों से विजय पताका लहराकर साबित कर दिया कि चुनाव में कोई भी राजा हो सकता है
धाकड़ ने खुद को बताया भाजपा का ही कार्यकर्ता
वहीं विजेता बनने के बाद धाकड़ ने कहा कि वो खुद भाजपा के ही कार्यकर्ता हैं। मैं भाजपा की नीति और विकास की सोच के साथ ही काम करूंगा। जीत के बाद भी धाकड़ का खुद को बीजेपी कार्यकर्ता बताने से विरोधियों को प्रहार करने का मौका नहीं मिला। लिहाजा इस जीत की जिले में काफी चर्चा है।