राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम से गरमाई MP की सियासत, युवाओं को साधने उतरी कांग्रेस, मिशन 2028 पर नजर

Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Sep, 2026 10:59 AM

rahul gandhi s indore youth connect ahead of mp 2028

मध्य प्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने अभी से सियासी जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है।

भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने अभी से सियासी जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी रणनीति के तहत 19 सितंबर को इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मुख्य आतिथ्य में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। करीब 15 दिनों तक आयोजन की अनुमति और स्थल को लेकर चली कवायद के बाद अब कार्यक्रम के लिए रीजनल पार्क के सामने आइडिया की जमीन 10 लाख रुपए किराए पर लेने की व्यवस्था हो गई है। कांग्रेस के लिए यह आयोजन महज छात्र सम्मेलन नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी का फोकस खासतौर पर युवा मतदाताओं पर है और इंदौर को इसके लिए रणनीतिक केंद्र बनाया गया है।

युवाओं के जरिए प्रदेश में पहुंच बनाने की कोशिश

मध्य प्रदेश कांग्रेस मिशन 2028 की दिशा में युवाओं को अपने साथ जोड़ने पर जोर दे रही है। इंदौर को कार्यक्रम के लिए चुनने के पीछे भी यही रणनीति मानी जा रही है। प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में शामिल इंदौर में मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं। मालवा-निमाड़ के अलावा प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों की मौजूदगी कांग्रेस को एक ही मंच के जरिए व्यापक युवा संपर्क का अवसर देती है। पार्टी राहुल गांधी की मौजूदगी में युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाकर छात्र वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।

इंदौर से मालवा-निमाड़ तक सियासी संदेश

मध्य प्रदेश की सत्ता की राजनीति में मालवा-निमाड़ का महत्व किसी से छिपा नहीं है। विधानसभा चुनावों में इस क्षेत्र का प्रदर्शन प्रदेश की सत्ता के समीकरणों पर सीधा असर डालता है। ऐसे में कांग्रेस का राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए इंदौर का चयन राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस क्षेत्र में कांग्रेस पर बड़ी बढ़त बनाई थी। इंदौर समेत कई जिलों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। ऐसे में पार्टी अब युवाओं और नए मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाकर आने वाले चुनाव के लिए माहौल तैयार करना चाहती है। इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से भी जुड़ा है। इंदौर उनका गृह जिला है और कार्यक्रम के लिए चुना गया इलाका उनकी राऊ विधानसभा सीट के अंतर्गत आता है। ऐसे में आयोजन की सफलता प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल मानी जा रही है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का गृह जिला धार भी इंदौर के करीब है। इससे कार्यक्रम का राजनीतिक दायरा केवल इंदौर तक सीमित न रहकर पूरे मालवा क्षेत्र तक जाता दिखाई दे रहा है।

2018 से 2023 तक बदले सियासी समीकरण

मालवा-निमाड़ में विधानसभा की करीब 66 सीटों का बड़ा चुनावी आधार है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां 35 सीटें जीतकर बीजेपी से बढ़त बनाई थी। बीजेपी को 28 सीटें मिली थीं, जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे।

लेकिन पांच साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 2023 में बीजेपी ने इस क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करते हुए 48 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस की सीटें घटकर 17 रह गईं, जबकि रतलाम की सैलाना सीट भारत आदिवासी पार्टी के खाते में चली गई।

यानी जिस क्षेत्र ने 2018 में कांग्रेस को मजबूत आधार दिया था, वहीं 2023 में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गया। यही वजह है कि कांग्रेस अब इस इलाके में संगठन, युवा संपर्क और बड़े नेताओं के कार्यक्रमों के जरिए दोबारा पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।

राहुल गांधी के कार्यक्रम से कितना बदलेगा माहौल?

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल भीड़ जुटाने की नहीं, बल्कि उसे राजनीतिक समर्थन में बदलने की है। राहुल गांधी का इंदौर दौरा पार्टी के लिए युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने का मौका जरूर है, लेकिन असली परीक्षा कार्यक्रम के बाद शुरू होगी। मालवा-निमाड़ में कांग्रेस को 2023 की हार से उबरने के लिए लंबी राजनीतिक कवायद करनी होगी। संगठन को मजबूत करने, युवाओं को जोड़ने और स्थानीय मुद्दों को चुनावी एजेंडे में बदलने की

चुनौती उसके सामने रहेगी।

फिलहाल ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए कांग्रेस ने 2028 की लड़ाई के लिए अपना एक संदेश जरूर साफ कर दिया है, पार्टी अब युवा वोट बैंक और मालवा-निमाड़ की सियासी जमीन पर दोबारा जोर लगाने की तैयारी में है। अब नजर इस बात पर होगी कि राहुल गांधी का यह कार्यक्रम कांग्रेस के लिए सिर्फ एक बड़ा आयोजन साबित होता है या आने वाले चुनाव की रणनीति का पहला बड़ा पड़ाव बनता है।

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