सांसद के अचानक पार्टी से इस्तीफे के बाद घर पर उमड़ा भाजपा कार्यकर्ताओं का हुजूम, दी शुभकामनाएं

Edited By Himansh sharma, Updated: 25 Apr, 2026 06:56 PM

rajya sabha mp resigns bjp workers celebrate at his home

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की खबर के बाद उनके गृहग्राम बटहा (लोरमी) में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

लोरमी/मुंगेली। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की खबर के बाद उनके गृहग्राम बटहा (लोरमी) में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके घर पहुंचकर जमकर आतिशबाजी की, मिठाइयां बांटीं और परिवार को बधाई दी।

संदीप पाठक के भाजपा में आने को लेकर स्थानीय भाजपा संगठन में खासा उत्साह नजर आया। उनके पिता शिवकुमार पाठक, जो जनसंघ के समय से ही भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे हैं, बेटे के इस फैसले से बेहद प्रसन्न दिखाई दिए। कार्यकर्ताओं ने उनके घर पहुंचकर मिठाई खिलाई और इसे परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया।

शिवकुमार पाठक भाजपा संगठन के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वे मंडल अध्यक्ष से लेकर जिला भाजपा उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। जिस समय संदीप पाठक ने भाजपा की सदस्यता ली, उस वक्त उनके पिता निजी कार्य से तखतपुर गए हुए थे। वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें बेटे के भाजपा प्रवेश की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने खुशी जाहिर की।

संदीप पाठक की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई लोरमी क्षेत्र में ही हुई। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए बिलासपुर गए। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वे दिल्ली स्थित आईआईटी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। शिक्षण क्षेत्र में शानदार करियर छोड़कर उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना और अरविंद केजरीवाल के साथ आम आदमी पार्टी से जुड़ गए।

आप में रहते हुए उन्होंने पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्टी संगठन को मजबूत करने और रणनीतिक फैसलों में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती रही। वे अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी और राजनीतिक सलाहकार भी रहे। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के पीछे भी संदीप पाठक की रणनीति को अहम माना जाता है।

इसी योगदान को देखते हुए पार्टी ने उन्हें पंजाब कोटे से राज्यसभा भेजा था। अब भाजपा में शामिल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। खासकर छत्तीसगढ़ और मध्य भारत की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है।

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