शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने द्रौपदी से की नूपुर शर्मा की तुलना, कहा- फिर से हो सका है महाभारत

Edited By meena, Updated: 17 Jun, 2022 08:22 PM

shankaracharya swami nischalanand compares nupur sharma to draupadi

राजनीति का अर्थ होता है नीतियों में सर्वोत्कृष्ट, जिसके द्वारा व्यक्ति और समाज को सुबुद्ध, स्वावलंबी व सुसंस्कृत बनाया जा सके। उन्माद, अदूरदर्शिता का नाम राजनीति नहीं है।

रायपुर(शिवम दुबे): राष्ट्रोत्कर्ष अभियान के उद्देश्य से देशभर की यात्रा में निकले ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ जगन्नाथपुरी के पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने राजधानी रायपुर में सरकार वार्ता को संबोधित करते हुए राजनीतिक परिपेक्ष्य में बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि उन्माद का नाम, सत्ता भोग का नाम, फूट डालो राज करो की कूटनीति का नाम राजनीति नहीं है। राजनीति का अर्थ होता है नीतियों में सर्वोत्कृष्ट, जिसके द्वारा व्यक्ति और समाज को सुबुद्ध, स्वावलंबी व सुसंस्कृत बनाया जा सके। उन्माद, अदूरदर्शिता का नाम राजनीति नहीं है। महाभारत, मत्स्यपुराण, अग्नि पुराण आदि में कहा गया है कि राजनीति का दूसरा नाम है राजधर्म। नीति और धर्म पर्यावाची शब्द हैं। साथ ही नूपुर शर्मा को लेकर बड़ा बयान दिया।

हिंदू शब्द तो नया है पहले तो सिर्फ सनातनी ही थे
शंकराचार्य महाराज ने बताया कि हिंदू आज कहने लगे हैं, पहले तो सनातनी ही कहते थे। सनातनी, वैदिक, आर्य, हिंदू चारों का प्रयोग कर सकते हैं। हिंद महासागर, हिंदकुट, हिंदी, हिंदू ये सब प्राचीन शब्द हैं। पुराण, ऋग्वेद में भी हिंदू शब्द का प्रयोग है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हिंसा कहीं भी हो, हम उसका समर्थन नहीं करते।

मंदिरों में साईं बाबा को मुख्य स्थान देना गलत
महाराज ने साईं बाबा के मंदिरों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है सांई बाबा के मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को किनारे करके साईं बाबा को मुख्य स्थान देना गलत है। साईं बाबा के नाम पर मंदिरों से देवी देवताओं हटाना गलत है। कोई किसी भी कुल में पैदा हुआ हो, उसके कुल की जानकारी देनी चाहिए। छुपाने से क्या मतलब है, यह तो भक्तों के साथ धोखा है।

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नुपूर शर्मा विवाद में शंकराचार्य ने कहा
नुपूर शर्मा के बयान से स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज सहमत नहीं है, उन्होंने विवाद को लेकर कहा, कब किसी को क्या कहना चाहिए ये समझदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, यदि द्रौपदी ने दुर्योधन को अंधे का बेटा न कहा होता तो शायद महाभारत न होती। लेकिन उनके इस एक शब्द के कारण महाभारत हुई। इसी संदर्भ को उन्होंने नुपूर शर्मा के विवाद से जोड़ा, लेकिन इसके बाद उन्होंने हंसते हुए ये भी कह दिया कि शायद इस युग में महाभारत की जरूरत हो।

शंकराचार्य मठ में लाउडस्पीकर पर नहीं चलाते कैसेट
पूरे देश में चल रहे लाउडस्पीकर विवाद पर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा, उनके पुरी मठ में कभी कैसेट पर कोई भजन लाउटस्पीकर पर नहीं बजता। उनका कहना है, उन्होंने ये आदेश दिया हुआ है कि जब भी वे मठ में न हों, वहां कैसेट पर कोई भजन न बजाएं। वहां माइक का उपयोग तभी हो जब वे मठ में हों और उन्हें कोई पूजा-पाठ करनी हो या उपदेश देना हो।

जल्द ही बस्तर दौरे पर जाएंगे पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य कार्यक्रम की बन रही रूपरेखा
पत्रकारों से चर्चा के समय पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, प्रदेश के मंत्री कवासी लखमा भी उपस्थित थे। जब लखमा आशीर्वाद लेकर बाहर निकले, उनको वापस बुलाया गया। इस दौरान शंकराचार्य के साथ मौजूद प्रमुख आचार्य ने मंत्री लखमा से कहा कि शंकराचार्यजी बस्तर क्षेत्र में एक भव्य कार्यक्रम करना चाहते हैं, इसके लिए उन्होंने एक प्रारूप बनाने का भी निवेदन किया है।

 

 

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